निगम: बकाया 140 करोड़, सख्ती स्कूलों के महज 5 करोड़ पर स्कूल: 400 रुपए की फीस में 10 लाख का टैक्स चुकाना भारी
आटा मांग कर स्कूलें खड़ी की ताकि वंचितों को शिक्षा दे सकें
वंचितों,गरीबों मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को शिक्षा मिल सके, इसके लिए जिन लोगों सामाजिक संस्थाओं ने कई परेशानियां झेली, आटा तक बेचा, मुश्किलों का सामना कर स्कूलें खड़ी कीं। समाज और सेवा भावना से चल रही इन स्कूलों में मामूली फीस ली जा रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च नहीं कर पा रहे, शिक्षकों का वेतन तक देना मुश्किल हो रहा है और अब निगम इनसे लाखों रुपए का नगरीय विकास कर मांग रहा है। हजारों रुपए फीस में वसूल रही निजी स्कूलों के मुकाबले बड़ी मुश्किल से टिकी इन स्कूलों में अगर यह टैक्स वसूला तो शिक्षा के इन मंदिरों को बंद तक करने की नौबत सकती है।
दस दशक पूर्व भीतरी शहर की उम्मेद सीनियर सैकंडरी स्कूल की भी यही कहनी है। रावणा राजपूत समाज के न्याति पंचों ने समाज में शिक्षा की अलख जगाने के लिए अपने न्याति नोहरे में यह स्कूल खोली थी। तब तत्कालीन महाराजा से किसी बात को लेकर स्कूल प्रबंधकों का विवाद हो गया था। स्कूल तो तब ही बंद हो जाती, लेकिन पंचों ने ऐलान किया कि समाज के हर घर में घटी (आटा चक्की) में पिसाई के दौरान पहला दौर का आटा मटकी में एकत्र करेंगे। पंच हर रविवार घर-घर यह आटा लेने जाते और उसे बाजार में बेचकर मिले पैसों से स्कूल का संचालन करते थे। कई बरसों तक यह क्रम चला पर स्कूल बंद नहीं होने दी। इस स्कूल से निकले कई छात्रों ने बाद में देश-दुनिया में अपना नाम भी कमाया, लेकिन अब निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ चुके हैं। जैसे-तैसे स्कूल का संचालन कर रहे हैं, लेकिन अब निगम की आेर से भेजे यूडी टैक्स के डिमांड नोटिस को लेकर असमंजस में हैं। अगर यह पैसा जमा करवाते हैं तो स्कूल पर ताला तक लगाना पड़ सकता है। ऐसी ही कहानी सामाजिक समरसता के प्रतीक माने जाने वाले सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित अन्य स्कूलों की भी है। विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों स्कूल संचालकों ने एक स्वर में कहा कि महापौर को एक प्रस्ताव लेकर राज्य सरकार को भिजवाना चाहिए, जिसमें ऐसी सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों को विशेष आदेश से कर मुक्त करवाने का आग्रह किया जाए।
^दैनिक भास्कर ने यह मुद्दा उठाकर सामाजिक समरसता वाली शैक्षणिक संस्थाओं का मान बढ़ाया है। कैसी भी विकट परिस्थितियां आई, लेकिन समाज और न्याति पंचों ने इन स्कूलों को बंद नहीं होने दिया। इस मुद्दे को निगम की साधारण सभा में प्रमुखता के साथ उठाऊंगा।
गणपतसिंहचौहान, पार्षदकार्यकारिणी सदस्य, उम्मेद सीनियर सैकंडरी स्कूल
पूर्व छात्र की राय
सेबी के पूर्व चेयरमैन डीआरमेहता नेसरदार स्कूल से वर्ष 1951 में मैट्रिक पास की थी
शहर के 20 हजार 198 लोगों और संस्थाओं से एक अरब 40 करोड़ 50 लाख से ज्यादा का यूडी टैक्स बकाया चल रहा है। लेकिन निगम वंचितों, गरीबों मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को सस्ती, सहज अच्छी शिक्षा सुलभ कराने वाली 100 वर्षों से चल रही शिक्षण संस्थाओं को छूट देने की बजाय डिमांड नोटिस थमाते हुए कर जमा नहीं करवाने पर सीज कर रहा है। शहर में संचालित हो रहे 233 सामाजिक निजी स्कूलों कॉलेजों में यूडी टैक्स के सिर्फ 5 करोड़ 23 लाख रुपए ही बकाया चल रहे हैं। अगर यह राशि निगम कोष में जमा भी हो जाए तो भी निगम की कंगाली दूर नहीं हो सकती है।
मौलाना अब्दुल कलाम आजाद स्कूल 70,10,250
हनुवंतसी सै स्कूल, पाल रोड 53,15,832
सेंटपॉल स्कूल 47,86,193
सरदारसीनियर सैकंडरी स्कूल 35,46,144
बालशिक्षण समिति, बाल मंदिर 28,10,136
सरप्रताप सीनियर सैकंडरी स्कूल 22,61,280
बीजेएससीनियर सैकंडरी स्कूल 14,07,447
कैंब्रिजपब्लिक स्कूल 12,57,697