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बयान दर्ज, आयोजक राणावत का इंतजार करती रही कमेटी

4 वर्ष पहले
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युद्धों की परिणति से उत्पन्न राष्ट्रवाद मंगलकारी नहीं होता

जेएनवीयूशैक्षिक संघ की ओर से बुधवार को राष्ट्रीय अस्मिता चिंतन चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता जेएनवीयू राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. पूनम बावा ने कहा कि आधुनिक राज्यवाद की अवधारणा में युद्धों की परिणति से उत्पन्न राष्ट्रवाद मंगलकारी नहीं होता। जबकि भारतीय संस्कृति में राष्ट्र का निर्माण सांस्कृतिक सद्भावना का स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों की ओर से फैलाए गए दुर्विचारों की मुक्ति के लिए हवन है। जेएनयू की प्रो. निवेदिता मेनन के भाषण का विरोध करने वाले प्रो. एनके चतुर्वेदी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने प्रोफेसर निवेदिता मेनन की ओर से दिए राष्ट्र विरोधी भाषण के प्रत्युत्तर में उनकी ओर से दिए संवाद को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जब सभी यूरोपीय देशों में उनकी अपनी भाषा होती है तो फिर अपने देश में दूसरे लोगों से संवाद के लिए अंग्रेजी माध्यम क्यो। संगोष्ठी को प्रो. कैलाश डागा, प्रो. चंदनबाला,प्रो. जयश्री वाजपेयी ने भी संबोधित किया। द्वितीय सत्र एबीवीपी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत घोष की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। जिसमें मुख्यवक्ता के रूप में जोधपुर के प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर ने कहा कि राष्ट्र विरोधी तत्व हमारी हिंदू सांस्कृतिक विचारधारा से परेशान है। डॉ. हरिसिंह राजपुरोहित ने कहा कि राष्ट्रवाद प्रहरियों को मुखर होने की आवश्यकता है। हेमंत घोष ने गौरव गहलोत का उदाहरण देते हुए उनका अभिवादन कर कहा कि उन्होंनें समय पर देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की पहल की। प्रो. प्रभावती चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन प्रो. कैलाश डागा ने किया। संगोष्ठी मे जोधपुर विभाग प्रचारक धर्मेंद्र सिंह, प्रो. अजय गुप्ता, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. अखिल रंजन गर्ग, प्रो. मनीष कुमार सहित प्रवक्ता विद्यार्थी उपस्थित थे। संगोष्ठी का समन्वयन संगठन के उपाध्यक्ष प्रो. विजय मेहता सचिव प्रो. विकल गुप्ता ने किया।

संगोष्ठी

जोधपुर | जयनारायणव्यास विश्वविद्यालय में जेएनयू प्रो. निवेदिता मेनन के कथित तौर पर देश विरोधी भाषण के मामले में गठित कमेटी के लगातार प्रयास के बाद भी आयोजक राजश्री राणावत कमेटी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुई। सुबह कमेटी के कन्वीनर ने उन्हें फोन लगा बुलाने का प्रयास किया तो उनका फोन बंद रहा था। इसके बाद शाम चार बजे तक कमेटी उनके आने का इंतजार करती रहीं। कमेटी ने बुधवार को एक शिक्षक के बयान लिए। शनिवार को कुलपति के लौटने पर कमेटी रिपोर्ट सौंपेंगी उसके बाद कोई कार्रवाई संभव हैं। अंग्रेजी विभाग के एक सेमिनार में जेएनयू की प्रो. मेनन ने कथित तौर पर देश विरोधी भाषण दिया था। मेनन के भाषण पर इतिहास विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. एनके चतुर्वेदी की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई थी। इस मामले को लेकर उनकी काफी कहासुनी भी हुई और जेएनयू से आए अन्य प्रो. भी प्रो. मेनन के पक्ष में उतर गए। बहस बढ़ती देख टी ब्रेक की घोषणा पर मामला शांत हुआ। इस मामले में कुलपति ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने अब तक इस मामले में आठ लोगों के लिखित बयान दर्ज कर किए है। जांच कमेटी के नोटिस के बावजूद अब तक आयोजक डॉ. राजश्री राणावत कमेटी के सामने पेश ही नहीं हुई। कमेटी ने एक अन्य शिक्षक भरत कुमार से भी इस मामले में जानकारी ली है।

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