बिलाड़ा. क्षेत्र के किसान अब बिस्तरा खाद तैयार कर मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ कम खर्च में अधिक फसल तैयार कर रहे हैं। पहले जहां कृषि फार्मस पर खुले में पड़े गोबर के ढेर से निकलने वाली मिथेन गैस से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था, वहीं अब किसान गोबर के ढेर को काले कवर से ढंक रहे हैं।
इससे मिथेन गैस का दुष्प्रभाव की बजाय बेहतर उपयोग हो रहा है। कारण कि यह गोबर के लिए लाभदायक है। इससे फसल उत्पादन बढ़ने के साथ जमीन उपजाऊ होती है।
ऐसे बनती है बिस्तरा खाद
जैविक खेती के लिए कार्य करने वाले मालाराम सीरवी ने बताया कि इसके लिए जमीन की सतह से 4 फीट चौड़ाई और लंबाई अपनी इच्छानुसार ले सकते हैं, जबकि ऊंचाई 5 फीट रखनी पड़ती है। एक-एक फीट की 5 परतें बिछाई जाती हैं। पहली परत में एक फीट अनाज से निकाला हुआ कचरा बिछाया जाता है। उसके बाद 5 किग्रा मक्की या दाल के आटे का छिड़काव किया जाता है।
फिर गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है। बाद में एक फीट गोबर की परत, उसके बाद एक फीट हरे चारे की परत, फिर एक फीट गोबर की परत तथा अंत में एक फीट मिट्टी की परत करने के बाद में काले कंवर से ढंक दिया जाता है। एक माह बाद इसे पलट कर उसमें ट्राइकोडरमा विरडी या हरजेनियम मिलाया जाता है। एक माह बाद फिर उसको पलटा जाता है। चार माह बाद बिस्तरा खाद तैयार हो जाती है।
बिस्तरा खाद के प्रति किसानों का बढ़ रहा रूझान
कृषि पर आधारित बिलाड़ा क्षेत्र के किसानों में जैविक खेती के प्रति रूझान बढ़ने लगा है। किसान अब जगह-जगह बिस्तरा खाद बनाने लगे हैं। यह मिट्टी और फसल के लिए बहुत उपयोगी है। इसका उपयोग करने वाले प्रगतिशील किसान मास्टर भंवरलाल ने कहा कि सभी किसान इसका उपयोग करें।
10 ट्राॅली खाद 14 बीघा के लिए पर्याप्त
4 फीट चौड़ाई, 10 फीट लंबाई व 5 फीट ऊंचाई में बनाई गई बिस्तरा खाद से 10 ट्राॅली खाद बनती है, जो 14 बीघा जमीन के लिए उपयोगी है।
बिस्तरा खाद के ये लाभ
मिट्टी उपजाऊ बनती है। अनाज पौष्टिक होता है। कम लागत में अनाज के अच्छे दाम मिलते हैं। अन्य खाद से 4 गुणा ज्यादा प्रभावी होती है। उत्पादन में वृद्धि होती है। इससे पौधे कभी जड़ से नहीं गलते है़। पानी की आवश्यकता भी कम होती है। फसल में खरपतवार नहीं होता है।
एक टन गोबर खाद में ये तत्व प्राप्त होते हैं
नाइट्रोजन 5 किग्रा, फास्फोरस 2 किग्रा, पौटाश 5 किग्रा, गंधक 7 किग्रा, कैल्शियम 10 ग्राम, मैग्नीशियम 3.5 ग्राम, लोह 300 ग्राम, मैग्नीज 250 ग्राम, जस्ता 100 ग्राम, तांबा 20 ग्राम, बोरोन 25 ग्राम, मोलिब्डेन 2 ग्राम।
लाभदायक है काले कवर से ढंकना
खुली गोबर से निकलने वाली मीथेन गैस पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। इसको काले कवर, पाॅलीथिन से ढंके। ढंकने से खाद जल्दी पकने के साथ मिथेन गैस फसल के लिए फायदेमंद होती है। खुला होने से उसमें लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं। किसान इसका उपयोग करने के बाद पाॅलीथिन को खुला नहीं छोड़ें। उसे सुरक्षित रख लें, ताकि कोई हाथ नहीं लगाए। -अजित केलकर, जैविक कृषि विशेषज्ञ