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बजट नहीं मिला तो चंदे से बना दिया प्रदेश की टॉप पीएचसी

5 वर्ष पहले
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बाड़मेर. एक छोटी सी सकारात्मक सोच से परिणाम कितने सुखद होते है, इसका अंदाजा बाड़मेर जिले की गिड़ा पीएचसी की बदली तस्वीर को देख लगाया जा सकता है। अस्पताल की जर्जर बिल्डिंग, छत से टपकते पानी से बरसात में तालाब बन जाता था। सरकार से अस्पताल के जीर्णोद्धार के लिए बजट भी नहीं मिल रहा था।
गांव वालों ने अस्पताल में इलाज के लिए भी जाना छोड़ दिया था, लेकिन एक डॉक्टर की जिद पर पूरे गांव के लोगों ने सकारात्मक पहल कर अस्‍पताल की तस्वीर बदल डाली। गांव के 700 लोगों ने करीब 8 लाख रुपए जुटाए। बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 100 किमी. दूर गिड़ा पीएचसी की तस्वीर किसी निजी अस्पताल से कम नहीं है।
सीसीटीवी कैमरों की नजर, रंग-बिरंगे फूलदार पौधों की महक और साफ-सुथरा अस्पताल परिसर। अब यह प्रदेश की टॉप पीएचसी में भी शामिल है। आसपास के दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण इसी पीएचसी में इलाज करवाने आते हैं। सालाना 25 हजार ओपीडी संख्या वाली प्रदेश की यह पहली पीएचसी है।
प्रदेश में सबसे ज्यादा ओपीडी वाली पीएचसी
गिड़ा पीएचसी प्रदेश की सबसे ज्यादा ओपीडी वाली पीएचसी है। यहां सालाना करीब 25 हजार से ज्यादा ओपीडी की संख्या है। वर्ष 2012 में 4200 की ओपीडी थी, जबकि अब 25 हजार हो गई है। पांच साल से परिवार कल्याण नियोजन में गिड़ा पीएचसी टॉप पर है। परिवार नियोजन में टॉप रहने वाले जिले की प्रथम पीएचसी को सरकार ने एक लाख रुपए प्रोत्साहन के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।
गांववालों ने उद्धार किया
बिल्डिंग की हालत बहुत खराब थी। गांव के लोगों के साथ बैठकर पहल की और चंदे से बिल्डिंग का जीर्णोद्धार करवाया। 11 लाख रुपए खर्च कर छत, फर्श बनवाई गई और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए। प्रदेश की सबसे ज्यादा 25 हजार आेपीडी है।-जोगेश चौधरी, चिकित्सा प्रभारी, पीएचसी गिड़ा।
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