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इस साध्वी ने 6 की उम्र में सुनाया था पहला भजन, अब विदेश में भी बनी पहचान

बता दें कि चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था।

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2016, 01:39 AM IST
गुरुदेव साध्वी चित्रलेखा गुरुदेव साध्वी चित्रलेखा
बांसवाड़ा(राजस्थान). शहर में 13 से 19 जून तक भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। इसमें हरियाणा की गुरुदेव साध्वी चित्रलेखा शामिल होने वाली हैं, जो 6 साल की उम्र से भागवत कथा करती आ रहीं हैं। कौन है साध्वी चित्रलेखा...
- बता दें कि चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था।
- उन्होंने 4 साल की उम्र से बंगाली गुरू गिरधारी बाबा की संस्था से जुड़ीं। यहीं से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई।
- 6 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार लोगों के बीच उपदेश देना शुरू किया।
- उन्होंने अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के बरसाना में दिया था। जहां बाबा रमेश ने उन्हें अचानक माइक देकर कुछ कहने के लिए कहा।
- जिसके बाद वे आधे घंटे तक लोगों के बीच उपदेश देती रहीं।
- इसके बाद वृंदावन में ही 7 दिन के लिए 'भागवत कथा' का कार्यक्रम ऑर्गनाइज किया गया।
- इस पूरे कार्यक्रम में बाबा रमेश ने चित्रलेखा से कथा करवाई।
विदेशों में करती हैं प्रोग्राम
- भजन व उपदेश के साथ चित्रलेखा की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है। वे अभी एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं।
- साधारण परिवार में जन्मी इस लड़की को भजन गाने, हार्मोनियम बजाने और उपदेश देने में माहिर हैं।
- भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।
- उन्हें देवी जी गुरुदेव चित्रलेखा के नाम से भी जाना जाता है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए इस साध्वी की फोटोज।
चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था। चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था।
4 साल की उम्र से बंगाली गुरू गिरधारी बाबा की संस्था से जुड़ीं। यहीं से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। 4 साल की उम्र से बंगाली गुरू गिरधारी बाबा की संस्था से जुड़ीं। यहीं से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई।
भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं। भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।
साधारण परिवार में जन्मी इस लड़की को भजन गाने, हार्मोनियम बजाने और उपदेश देने में माहिर हैं। साधारण परिवार में जन्मी इस लड़की को भजन गाने, हार्मोनियम बजाने और उपदेश देने में माहिर हैं।
अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के बरसाना में दिया था। जहां बाबा रमेश ने उन्हें अचानक माइक देकर कुछ कहने के लिए कहा। अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के बरसाना में दिया था। जहां बाबा रमेश ने उन्हें अचानक माइक देकर कुछ कहने के लिए कहा।
भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं। भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।
उन्हें देवी जी गुरुदेव चित्रलेखा के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें देवी जी गुरुदेव चित्रलेखा के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान आएंगी चित्रलेखा। राजस्थान आएंगी चित्रलेखा।
भजन व उपदेश के साथ चित्रलेखा की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है। वे अभी एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं। भजन व उपदेश के साथ चित्रलेखा की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है। वे अभी एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं।
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गुरुदेव साध्वी चित्रलेखागुरुदेव साध्वी चित्रलेखा
चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था।चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 में हरियाणा की एक ब्राहमण परिवार में हुआ था।
4 साल की उम्र से बंगाली गुरू गिरधारी बाबा की संस्था से जुड़ीं। यहीं से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई।4 साल की उम्र से बंगाली गुरू गिरधारी बाबा की संस्था से जुड़ीं। यहीं से उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई।
भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।
साधारण परिवार में जन्मी इस लड़की को भजन गाने, हार्मोनियम बजाने और उपदेश देने में माहिर हैं।साधारण परिवार में जन्मी इस लड़की को भजन गाने, हार्मोनियम बजाने और उपदेश देने में माहिर हैं।
अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के बरसाना में दिया था। जहां बाबा रमेश ने उन्हें अचानक माइक देकर कुछ कहने के लिए कहा।अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के बरसाना में दिया था। जहां बाबा रमेश ने उन्हें अचानक माइक देकर कुछ कहने के लिए कहा।
भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।भारत के साथ-साथ वे यूके, यूएस और अफ्रीका में भी कार्यक्रम कर चुकी हैं।
उन्हें देवी जी गुरुदेव चित्रलेखा के नाम से भी जाना जाता है।उन्हें देवी जी गुरुदेव चित्रलेखा के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान आएंगी चित्रलेखा।राजस्थान आएंगी चित्रलेखा।
भजन व उपदेश के साथ चित्रलेखा की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है। वे अभी एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं।भजन व उपदेश के साथ चित्रलेखा की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है। वे अभी एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं।
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