पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अपराधों पर नियंत्रण कर सिस्टम को सरल, सुगम व पारदर्शी बनाएंगे

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जोधपुर. राज्य न्यायिक अकादमी में चल रहे जिला जजों के ट्रेनिंग प्रोग्राम और दो दिवसीय वर्कशाॅप के समापन समारोह के अवसर पर रविवार को न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका के प्रमुख लोग मौजूद थे।
माहौल में इतनी सहजता थी कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अजीतसिंह ने वैलेंटाइन-डे की बधाई देते हुए प्रदेश के लोगों को सरल, सुगम व पारदर्शी सिस्टम देने का कमिटमेंट किया।
अकादमी के चेयरमैन न्यायाधीश गोविंद माथुर ने स्वागत भाषण में ही कह दिया कि माघ महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी, वैलेंटाइन-डे पर सभी का स्वागत है। फिर तो मुख्यमंत्री व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने भी इसे दोहराया और एक-दूसरे के सम्मान की रक्षा करने का आह्वान किया। न्यायपालिका व कार्यपालिका ने सोसायटी में बढ़ रहे अपराधों पर चिंता जताई, उनके समाधान के रास्तों पर चर्चा की और किसे-क्या सुधार करना है इस पर खुल कर बातें की।
यह भी तय किया कि दोनों साथ-साथ चल कर सोसायटी को त्वरित व निष्पक्ष न्याय दिलाएंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने परिसर में बने गेस्ट हाउस का लोकार्पण किया। अकादमी के डायरेक्टर बीआर चौधरी ने सभी का आभार जताया।
न्यायपालिका
- हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश अजय रस्तोगी ने कहा ट्रायल कोर्ट में कुल 12.91 लाख केस पेंडिंग हैं। इनमें क्रिमिनल केस 8.74 लाख व सिविल केस 4.17 लाख हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधीशों के आधे पद खाली हैं, लेकिन अब नियुक्तियां शुरू हो गई हैं।
- न्यायाधीश रस्तोगी ने कहा कि जांच एजेंसियों की कमी, गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण सहित तकनीकी आधार पर भी अपराधी बच निकलते हैं। जांच एजेंसी सही जांच करे, पुख्ता सबूत जुटाए। न्यायाधीश सभी पैरामीटर परख कर न्याय करें।
- न्यायाधीश ने कहा कि अपराध के तरीके बदल गए हैं इसलिए ट्रेनिंग प्रोग्राम सिर्फ लर्निंग प्रोसेस ही नहीं, अपडेट करने वाला भी है। कानून समाज के लिए है, समाज कानून के लिए नहीं। बेरोजगारी के कारण अपराध बढ़ रहे हैं। युवाओं को रोजगार के अवसर दिलाने के गंभीर प्रयास होने चाहिए।
कार्यपालिका
- मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका एक-दूसरे के साथ सहयोग करे और समझ के साथ बढ़े तो समाज को राहत देने वाले हर काम आसान हो सकते हैं। त्वरित न्याय के लिए लोक अदालतें काफी मददगार साबित हो रही हैं।
- न्याय आपके द्वार कार्यक्रम से 2 माह में 74 हजार केस निपटाए गए हैं। हजारों केस डिस्पोजल कराए और छोटी-छोटी समस्याओं के 21 लाख प्रकरण निपटा कर लोगों को बड़ी राहत दी है। जमीनों के मामले ही बाद में आपराधिक मामले बनते हैं, इसलिए यह प्रयास अपराध कम करेगा।

- सरकार तीन पिलर पर है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन-हेल्थ और स्किल डेवलपमेंट। सड़कें सुधरेंगी तो हादसे कम होंगे, शिक्षा व स्किल डेवलपमेंट से प्राइवेट सेक्टर में लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा तो भी अपराध कम होंगे। त्वरित न्याय के लिए वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से ट्रायल कराने का प्रयास है, केंद्र व सुप्रीम कोर्ट भी ई-कोर्ट पर आगे बढ़ रहे हैं।
खबरें और भी हैं...