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16 महकमे कोर्ट में तलब, सख्त हिदायत- अपना वेस्ट डंपिंग स्टेशन तक खुद पहुंचाए

5 वर्ष पहले
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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोविंद माथुर व निर्मलजीत कौर ने कैरू डंपिंग स्टेशन पर सीधे ही कचरा नहीं पहुंचाने व सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने में सहयोग नहीं करने पर जेएनवीयू व रेलवे सहित 16 महकमों के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता माधोसिंह कच्छवाह की ओर से अधिवक्ता हापूराम विश्नोई द्वारा दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अफसरों से कहा कि अपने संस्थानों का कचरा सीधे ही कैरू डंपिंग स्टेशन तक परिवहन करें, असमर्थ हैं तो इसके लिए निगम को भुगतान करें।
यह व्यवस्था शनिवार से ही लागू हो। उन्होंने वीकली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. पीएस भाटी को निर्देश दिए कि जो विभाग इसकी पालना नहीं करते हैं तो जानकारी कोर्ट के ध्यान में लाई जाएं। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “शहर के बीचोंबीच जेएनवीयू के पास इतनी बड़ी जमीन है, जिसकी वह ठीक सार-संभाल नहीं कर पा रहा है।
अगर जमीन नहीं संभल रही है तो वे सरकार को यह जमीन किसी और को देने के लिए लिखेंगे।’ जेएनवीयू रजिस्ट्रार गोविंदसिंह चारण व अतिरिक्त महाधिवक्ता पीआर सिंह ने कैंपस को साफ-सुथरा व निगम को पूरा सहयोग देने को लेकर आश्वस्त किया। अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
जेएनवीयू नाले के लिए जमीन देने को तैयार
जेएनवीयू के रजिस्ट्रार चारण ने कोर्ट को बताया कि नाला निर्माण के लिए विवि जमीन देने को तैयार है। इस संबंध में सिंडीकेट में सहमति हो चुकी है। इस पर कोर्ट ने निगम के साथ बैठक कर इसके शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। कोर्ट ने मौखिक रूप से फल मंडी के सचिव से कहा कि शहर में कचरा करते हो।
इसे उठाने के क्या इंतजाम हैं? क्या कचरा सीधे कैरू भिजवाते हैं? इस पर मंडी सचिव ने जवाब दिया कि कचरा भिजवाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा, निगम ने तो बताया कि कचरा नहीं आ रहा है। या तो आप झूठ बोल रहे हो या फिर ठेकेदार आपको बेवकूफ बना रहा है। तुरंत व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।
शहर में इतनी पॉलीथिन का उपयोग क्यों?
निगम: सीज पॉलीथिन रखने की जगह नहीं
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मौखिक रूप से नगर निगम से पूछा कि शहर में इतना पॉलीथिन कैसे हैं तो बताया गया कि अब तक 70 टन पॉलीथिन जब्त किया गया है लेकिन इसे रखने के लिए जगह नहीं है। फिर कोर्ट ने पूछा कि रोक होने के बावजूद पॉलीथिन मैन्यूफैक्चरिंग हो रहा है? तो निगम की ओर से जवाब दिया गया कि पॉलीथिन जब्त करते हैं तो संबंधित व्यक्ति कहता है कि यह प्रतिबंधित की श्रेणी में नहीं अाता है।
निगम के पास यह जांचने के लिए एक्सपर्ट नहीं है। निगम यह नहीं बता पाया कि कितने माइक्रो तक की पॉलीथिन पर रोक है? बस यही कहा कि पॉलीथिन के निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने की वजह से दिक्कत आ रही है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए पर्यावरण विभाग व राज्य सरकार को पॉलीथिन के उपयोग को रोकने के संबंध कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।
16 प्रमुख विभागों के अफसर मौजूद
नगर निगम, जेएनवीयू, एसएन मेडिकल कॉलेज, रेल्वे, कृषि उपज मंडी अनाज, आफरी, रीको, जोधपुर डिस्कॉम, कृषि उपज मंडी फल व सब्जी, पीएचईडी, एम्स, काजरी, बीएसएनएल, आरएसआरडीसी, आर्मी, एयरफोर्स व बीएसएफ के अधिकारी मौजूद थे।
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