जैसलमेर. देश भर में मंदिरों में महिलाओं के जाने को लेकर विवाद गहराया हुआ है। इस बीच जैसलमेर में एक ऐसा मंदिर है जहां पुजारिन भी महिला होती है और यहां पूजा करने महिलाओं काे साथ ले जाना जरूरी होता है। यहां जोड़े ही पूजा करते हैं। क्यों सुहागरात से पहले इस मंदिर में आते हैं दूल्हा-दुल्हन...
- जैसलमेर के खेतपाल मंदिर में नवविवाहित जोड़े शादी के एक दो दिन के भीतर यहां पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैँ।
- ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा अर्चना किए बिना कपल सुहागरात मानते हैं।
- जो लोग शादी के बाद यहां नहीं आ सकते हैं वे पूजा के लिए एक नारियल अलग से रख देते हैं, बाद में कभी जाकर पूजा करवाई जाती है।
- इस मंदिर में आने की परंपरा यह है कि शादी के बाद पति पत्नी के बीच बांधा जाने वाले वाला विवाह बंधन सूत्र इसी मंदिर में आकर खोला जाता है।
- खेेेतपाल को पुत्र देने वाला भगवान माना जाता है। शादी के बाद पूजा अर्चना इसी उद्देश्य से ही की जाती है।
- उसके बाद प्रेग्नेंट महिलाएं यहां पूजा करने आती है और कोई बच्चा होने के बाद भी पूजा की जाती है।
लाखों जोड़े दे चुके हैं धोक
जैसलमेर में परंपरा है कि शादी होने के पश्चात खेतपाल मंदिर में धोक देना अनिवार्य है। एक अनुमान के मुताबिक आज तक यहां लाखों जोड़े धोक दे चुके हैं। हर जाति के लोग यहां शादी के बाद पूजा अर्चना करने के लिए जाते हैं। यहां के माली समाज की महिलाएं ही इस मंदिर की पुजारिन है और विशेष तौर पर आने वाले दंपती में से महिला के हाथ से पूजा करवाई जाती है।
सात देवियों का भाई है खेतपाल
खेतपाल को क्षेत्रपाल व भैरव भी कहा जाता है। सिंध से आने वाली सात बहनें जो देवियों के रूप में जैसलमेर के कोने कोने में विराजमान है, खेतपाल उनका भाई है। जैसलमेर में सबसे प्राचीन मंदिर बड़ाबाग में है जो करीब एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है।
आगे की स्लाड्स में देखिए मंदिर की फोटोज...