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भारत-पाक बॉर्डर पर 20 लेडी अफसर, 12 दिन में ऊंटों पर पूरा किया 410 Km

3 राज्यों की 20 महिला अफसर 2 राज्यों के 8 जिलों के 250 गांवों से होकर 29 दिन बाद पहुंचेगी वाघा बॉर्डर

Danik Bhaskar | Aug 28, 2017, 05:29 AM IST
3 दिन बाद बीकानेर में प्रवेश करेगी कैमल सफारी। 3 दिन बाद बीकानेर में प्रवेश करेगी कैमल सफारी।
बाड़मेर. भारत-पाक बॉर्डर पर बेटी बचाओं का संदेश लेकर रवाना हुई कैमल सफारी ने 12 दिनों में 410 किलोमीटर तक का सफर पूरा किया। अब 31 अगस्त को कैमल सफारी बीकानेर बॉर्डर में प्रवेश करेगी। देश में लिंगानुपात के लिहाज से राजस्थान, हरियाणा व पंजाब दूसरे राज्यों के मुकाबले निचले पायदान पर हैं। बेटी बचाओ मिशन को लेकर शुरू की गई कैमल सफारी में रोल मॉडल के तौर गृह मंत्रालय ने इन तीनों राज्यों से एयरफोर्स व बीएसएफ अफसर बनी महिलाओं को शामिल किया है। ये महिलाएं भारत-पाक सीमा से सटे गांवों में यह संदेश दे रही हैं कि बेटियां किसी से कम नहीं है। भास्कर ने कैमल सफारी टीम में शामिल महिला अफसरों से बात की। पेश है उनकी उनकी जुबानी...
शिक्षा के प्रति जागरूकता से ही बदलेगा देश:कृति दीक्षित
कैमल सफारी में पहली बार बॉर्डर पर बसे गांवों की महिलाओं व बेटियों से मिलकर बेहद खुशी मिली। ग्रामीण क्षेत्र की बालक-बालिकाओं में प्रतिभा है,लेकिन तलाशने की जरूरत है। साक्षरता के दृष्टि से सरहदी गांव पिछड़े हैं। इस कारण सामाजिक, आर्थिक बदलाव नजर नहीं आ रहा है। इसके लिए सार्थक प्रयासों की जरूरत है।
बेटा बेटी एक समान का संदेश हैं कैमल सफारी
लिंगानुपात में सुधार को लेकर राजस्थान, हरियाणा व पंजाब की बीएसएफ,एयरफोर्स महिला अफसरों को कैमल सफारी में पहली बार शामिल किया गया है। ये महिलाएं बेटा-बेटी एक समान का संदेश देने के साथ बालिका शिक्षा का महत्व समझा रही हैं। -प्रतुल गौतम, डीआईजी, बीएसएफ बाड़मेर।
सरहद के गांवों की बेटियों की आंखों में चमक है: तनुश्री
बाखासर से गडरारोड तक कैमल सफारी के दौरान सरहदी गांवों की बेटियां व महिलाओं से रूबरू होने का अवसर मिला। बेटियों की आंखों में चमक दिखी और वे पढ़-लिखकर कामयाब होना चाहती हैं। घर की चौखट तक सीमित रहने वाली महिलाओं के मन में आत्मविश्वास की कमी है। इस वजह से वह खुलकर बोल नहीं पा रही है।
राजस्थान में बाल विवाह सबसे बड़ी चुनौती है: प्रियंका
राजस्थान में लड़कियों की पढ़ने-लिखने की उम्र में शादी कर दी जाती है। यह आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है। बेटियों को समानता का अधिकार नहीं है। नतीजा उन्हें अवसर नहीं देते। इस धारणा को तोड़ना ही होगा। विकट हालातों के बावजूद हर क्षेत्र में बेटियां अपने बूते सफलता की कहानियां गढ़ रही है।
शादी बोझ नहीं है, सिर्फ नजरिया बदलना होगा:चंद्रकला
महाराष्ट्र की रहने वाले चंद्रकला बीएसएफ अफसर है। वह बताती हैं कि महिलाएं अक्सर शादी को बोझ समझ लेती है। ऐसा नहीं है उसने शादी कर रखी है और दो बच्चे हैं। वह अकेली दो बच्चों के साथ बाड़मेर में नौकरी करती है। बॉर्डर पर ड्यूटी करने के साथ बच्चों की देखभाल करने में कोई परेशानी नहीं है। हमें जागरूक होकर बेटियों को अवसर देने का फर्ज पूरा करना होगा।
कृति दीक्षित। कृति दीक्षित।
प्रियंका। प्रियंका।
बीएसएफ अफसर चंद्रकला। बीएसएफ अफसर चंद्रकला।