'युद्ध वाली देवी' नाम से फेमस है मंदिर, नहीं फटे थे पाक द्वारा फेंके 3000 बम

5 वर्ष पहले
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जोधपुर.राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को परास्त करने में तनोट माता की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां ये मान्यता है कि माता ने सैनिकों की मदद की और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा था। जैसलमेर से थार रेगिस्तान में 120 किमी. दूर सीमा के पास स्थित है तनोट माता का सिद्ध मंदिर। यह मंदिर भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सैनिकों के लिये भी आस्था का केन्द्र रहा है। आज Dainikbhaskar.com नवरात्र के मौके पर एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहा है जिस पर दुश्मन द्वारा दागे गए गोले भी मंदिर को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाए थे। लगभग 3000 तोप के गोले दागे थे पाकिस्तान ने...
 
- मंदिर को बीएसएफ ने अपने नियंत्रण में ले लिया। आज यहां का सारा प्रबंध सीमा सुरक्षा बल के हाथों में है।
- माता का मंदिर जो युद्ध के दौरान सुरक्षाबलों का कवच बना रहा, शांति होने पर सुरक्षाबल इसका कवच बन गये।
- मंदिर के अंदर ही एक संग्रहालय है, जिसमें वे गोले भी रखे हुए हैं। पुजारी भी सैनिक ही है। सुबह-शाम आरती होती है।
- मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक रक्षक तैनात रहता है, लेकिन प्रवेश करने से किसी को रोका नहीं जाता।
- फोटो खींचने पर भी कोई पाबंदी नहीं। इस मंदिर की ख्याति को हिंदी फिल्म 'बॉर्डर' की पटकथा में भी शामिल किया गया था।
 
बॉर्डर मूवी में भी इसका जिक्र किया गया है...
 
-17 से 19 नवंबर 1965 को शत्रु ने तीन अलग-अलग दिशाओं से तनोट पर भारी आक्रमण किया था।
- दुश्मन के तोपखाने जबर्दस्त आग उगलते रहे और तनोट की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेनेडियर की एक कंपनी और सीमा सुरक्षा बल की दो कंपनियां दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी।
- इस घटना की याद में तनोट माता मंदिर के संग्रहालय में आज भी पाकिस्तान द्वारा दागे गये जीवित बम रखे हुए हैं।
- 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना की तरफ से गिराए गए बम भी इस मंदिर पर खरोंच तक नहीं ला सके, यहां तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे भी नहीं।
-तनोट माता के आशीर्वाद से भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना पर हावी हो गई और जवाबी आक्रमण के फलस्वरूप पाकिस्तानी सेना को भयंकर नुकसान हुआ और उन्हें पीछे लौटना पड़ा। 
 
आगे की स्लाइड्स में देखें, मंंदिर में रखे गोले और मंदिर की Photos...
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