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कौनसी खेप कब की, जांच रहे हैं : देशमुख

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. जोधपुर पुलिस ने इस वर्ष मार्च में 98 हजार रुपए के जाली नोट पकड़े थे, वे अभी बाड़मेर में पकड़े गए ढाई लाख रुपए के जाली नोट की खेप का हिस्सा थे। अब तक की तफ्तीश से खुलासा हुआ है कि तस्करों ने चार बार सीमा पार की है, जिनमें दो बार जाली नोट दो दफा हेरोइन हथियार की सप्लाई हुई थी। जोधपुर पुलिस उस वक्त सही जांच कर दूसरे तस्करों तक पहुंचती तो उसके बाद हुई तीन घुसपैठ तस्करी रुक सकती थी।
बाड़मेर पुलिस और एटीएस अब हेरोइन हथियार बरामद करने का प्रयास कर रही है। यह संयुक्त टीम बॉर्डर पर उस जगह की तस्दीक बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट को भी करवा चुकी है जहां से कुख्यात तस्कर नबिया ने ये खेप पार करवाई थी।

हथियार आने की प्रबल संभावना क्यों?

बॉर्डर पर रहने वाला तस्कर अल्लानूर का भाई भी पाक तस्कर है। अल्लानूर वर्ष 2009 में 15 किलो आरडीएक्स, 12 पिस्टल, 1050 कारतूस 50 किलो हेरोइन लाने के मामले में पकड़ा गया था। अल्लानूर अभी पकड़ी गई नबिया गैंग दोनों में गहरे रिश्ते हैं और नबिया गैंग के भी पाक तस्करों से रिश्ते पुलिस ने उजागर किए हैं। ट्रेंड भी यही है कि पाक तस्कर जाली नोट तभी देते हैं जब हेरोइन हथियार लिए जाते हैं।

जोधपुर पुलिस की नाकामी से पहुंचे हथियार

जोधपुर पुलिस ने इस वर्ष मार्च में नबिया को जाली नोटों के साथ पकड़ा था, तब उसने गुजरात के तस्कर का नाम बताया था जो गलत था। हकीकत में नबिया, मोहम्मद रमजान यह खेप फरवरी में लाए थे। जोधपुर पुलिस गुजरात एंगल पर चलती रही इसलिए कुछ हाथ नहीं आया। इधर नबिया की गैंग जून, अगस्त नवंबर की खेप ले आई जिसमें हथियार भी थे।

> नबिया, रमजान मोहम्मद के रिश्ते पाक तस्कर रोशन से हैं। रोशन ने फरवरी में जाली नोट भेजे। इनमें से 98 हजार जोधपुर में और एक लाख भीलवाड़ा में पकड़े गए थे। बची हुई खेप अभी बाड़मेर पुलिस ने पकड़ी है

> इस वर्ष जून में ही पाक से दूसरी खेप आई, उसमें भी जाली नोट थे। तीसरी बार अगस्त में माल पहुंचाया गया उसमें हेरोइन और नवंबर की खेप में हथियार भेजे गए, उसमें से 93 कारतूस बाड़मेर पुलिस को बरामद हुए हैं।