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ग्राम पंचायत पुनर्गठन की अधिसूचना के अनुसरण में आगे की कार्यवाही से रोक हटाई

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज. जोधपुर| पंचायतपुनर्गठन के तहत आपत्तियों का निस्तारण नहीं करने सहित अन्य नियमों के उल्लंघन को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को बहस पूरी हुई। अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। साथ ही ग्राम पंचायत पुनर्गठन की अधिसूचना के अनुसरण में आगे की कार्यवाही पर एकलपीठ द्वारा लगाई गई रोक को हटाने के आदेश भी दिए।

एकलपीठ ने पंचायतराज विभाग की ओर से गत पांच नवंबर को पंचायत पुनर्गठन के लिए जारी अधिसूचना के अनुसरण में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। तीन दिन की बहस के बाद गत पांच दिसंबर को मामला विधायी प्रकृति का होने के कारण खंडपीठ को रेफर कर दिया गया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता विकास बालिया ने पैरवी करते हुए कहा कि अनुच्छेद 243ई के तहत पंचायत संस्थाओं का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जाने जरूरी हैं। रोक की वजह से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जबकि अनुच्छेद 243ओ के तहत पुनर्गठन प्रक्रिया को भी विधायी प्रकृति का माना गया है। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने पैरवी करते हुए कहा कि पुनर्गठन नियमों के अनुसार किया गया है, इन पर मिली आपत्तियां भी नियमानुसार निस्तारित की गई हैं। याचिकाकर्ता मूसे खान अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जीआर पूनिया, आनंद पुरोहित सहित विभिन्न अधिवक्ताओं ने पैरवी की। उनकी ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने पंचायतराज अधिनियम 1994 के प्रावधानों के विपरीत जाते हुए समय-समय पर जारी निर्देशों का उल्लंघन किया है और जिला कलेक्टर द्वारा भेजे गए अंतिम प्रस्ताव को नकारते हुए गत 5 नवंबर को अधिसूचना जारी कर दी। खंडपीठ ने तीनों पक्षकारों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। साथ ही गत पांच नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसरण में अग्रिम कार्यवाही पर एकलपीठ द्वारा लगाई रोक को हटा दिया।