- Hindi News
- कुप्रथा पर कानून हो, नहीं तो प्रदेश को पिछड़ा घोषित करेंगे
कुप्रथा पर कानून हो, नहीं तो प्रदेश को पिछड़ा घोषित करेंगे
जोधपुर | डायन,मौताणा और बैर कुप्रथाओं पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इनकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार से 11 फरवरी तक कानून बनाने को कहा है। इस अवधि तक कानून नहीं बनाने पर प्रदेश को सामाजिक रूप से पिछड़ा घोषित करने की चेतावनी दी है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। शेष| पेज 9
जनहितयाचिका (शंकरलाल बनाम सरकार) पर सुनवाई के तहत दिए।
खंडपीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि डायन के नाम पर महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाना या मार देना बेहद घृणित कार्य है। कुप्रथाओं की आड़ में महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, इसे रोकने के लिए सरकार को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। हाईकोर्ट ने अंसतोष जताते हुए कहा कि गत नवंबर में पिछली सुनवाई के दौरान इस संबंध में कानून बनाने के लिए कहा था, लेकिन सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. पीएस भाटी ने पैरवी की।
वर्ष 2013 में हुए थे प्रयास:
राजस्थान में वर्ष 2013 में डायन मौताणा जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अध्यादेश लाया गया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह कानूनी रूप नहीं ले पाया।