जोधपुर. जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अफसरों ने विकास कार्यों के नाम पर पिछले कुछ सालों में शहर में कई जगह बिना जरूरत रोड लाइटें बदल दी। जहां कम पावर की लाइटों से भी काम चल सकता है, वहां ज्यादा पावर की लाइटें लगवाई गई। इस काम पर करीब 200 करोड़ रुपए फूंके गए। जेडीए ने खुद तो पानी की तरह पैसा बहाया ही, यह काम अब नगर निगम जोधपुर डिस्कॉम पर भी भारी पड़ रहा है। कारण, पिछले एक साल में ही बिजली की खपत रोजाना 68 हजार 862 यूनिट बढ़ गई। इससे बिजली खर्च रोजाना 3.78 लाख रुपए बढ़ गया।
शहर में तीन साल में रोड लाइट पॉइंट्स दुगुने हो गए। वर्ष 2011 में जहां 35 हजार 985 रोड लाइट पाइंट्स थे, इस साल फरवरी तक इनकी संख्या 66 हजार 602 हो गई। इतना कुछ होते हुए भी शास्त्री सर्किल से हनवंत स्कूल जाने वाली रोड, डिस्कॉम के सामने वाली रोड, सरदारपुरा की ज्यादातर रोड्स सहित शहर की कई प्रमुख सड़कें हर रात अंधेरे में डूबी रहती हैं।
वसूली- 3.75लाख लोग चुका रहे बिल, हालात- 3साल में दुगुने हुए पॉइंट्स
वर्ष 2011 कुल35985 रोड लाइट्स पॉइंटस थे। इसमें ट्यूब लाइट्स 18203, सोडियम लाइट 10632, मेटेहे लाइट 6687, मरकरी लाइट 438 हाईमास्ट लाइट 20 थीं।
वर्ष2014 कुल66602 रोड लाइट्स पॉइंट्स हो गए। ट्यूब लाइट 23150, सोडियम लाइट्स 24166, मेटेहे लाइट 15732, मरकरी लाइट्स 3074, हाईमास्ट लाइट बड़ी 98 छोटी 131 हो गई।
रोड लाइट्स की पहले सीधी बिलिंग होती थी। जोधपुर डिस्कॉम अभी भी नगर निगम में 80 से 90 करोड़ रु. मांगता है। अक्टूबर 2012 में राज्य सरकार ने यह व्यवस्था बदल दी। अब बिजली बिलों के जरिए वसूले जाने वाले अरबन सेस की राशि का रोड लाइट में समायोजन किया जा रहा है। जोधपुर में पौने चार लाख बिजली उपभोक्ताओं से 15 पैसे प्रति यूनिट की दर से अरबन सेस वसूला जाता है। इस हिसाब से डिस्कॉम को प्रतिमाह सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपए ही मिल रहे हैं जबकि बिलिंग ज्यादा हो रही है।
शहर में पिछले दो साल में जरूरत से ज्यादा रोड लाइट्स लगा दी गई। इससे बिजली खपत खर्चा दोनों ही बढ़ गए हैं। इस मुद्दे पर राजस्थान रिन्युएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन के निदेशक ने एक्सईएन को जयपुर बुलाया था। मैं भी उनसे जयपुर में मिला था। एक्सईएन को सर्वे करने के लिए कहा है।
फोटो- अंधेरे में डूबी न्यू पावर हाउस रोड।