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बसें होते हुए भी शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन गड़बड़ाया, दो साल में पांच गुना बढ़ेगा दबाव

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. शहर में वर्तमान पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो दो साल बाद स्थिति और भयावह हो सकती है। पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को लेकर एडीबी (एशियन डवलपमेंट बैंक) के सर्वे के अनुसार वर्ष 2016 में दबाव पांच गुणा से अधिक बढ़ जाएगा। अभी पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का दबाव 10 हजार लोगों का है जो दो साल बाद बढ़कर 54 हजार तक पहुंच जाएगा। शहर में एक साल पहले आई बीआरटीएस की 29 बसें प्रशासनिक लापरवाही के चलते सड़क पर नहीं उतर पाई हैं।
प्रशासन का यही ढर्रा रहा तो दो साल बाद शहर के लोगों को सुगम, सुरक्षित सस्ते ट्रांसपोर्टेशन के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। दैनिक भास्कर ने 14 सितंबर को \\"एक साल से खड़ी-खड़ी खटारा हो गईं 29 बीआरटीएस बसें, 4 करोड़ का घाटा\\' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया था। जबकि एडीबी द्वारा करीब डेढ़ साल पहले किए गए प्रारंभिक सर्वे में यह बात सामने आई कि पावटा सर्किल से पीक अवर्स के दौरान एक घंटे में करीब 7 हजार लोग सिटी बसों से 12 सौ लोग ऑटो में सफर करते हैं।
जालोरी गेट से एक घंटे में 16 सौ लोग सिटी बस 5 सौ लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। अब इनमें भी काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। बढ़ते दबाव के साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को लेकर व्यापक व्यवस्था नहीं की गई तो दो साल बाद हालात बेकाबू हो जाएंगे। ऐसे में बीआरटीएस की समुचित व्यवस्था ही इसमें कारगर साबित हो सकती है।