जोधपुर. सरकार के नुमांइदों के लिए पूरा सिस्टम बना हुआ है। लोक सेवा गारंटी योजना से बंधे हुए हैं और लापरवाही या उदासीनता पर नोटिस, निलंबन और बर्खास्त जैसी कार्रवाई भी होती है तो यही सिस्टम जनप्रतिनिधियों के लिए क्यों नहीं है? भदवासिया से मंडोर एरिया के छह वार्डों के लिए हुए भास्कर के रूबरू कार्यक्रम में यह बात उठी। लोगों ने सरकारी सिस्टम की तर्ज पर जनप्रतिनिधि सिस्टम डवलप करने की जरूरत बताई। जैसे, पंचायत भवनों की तरह वार्ड भवन हो, स्वच्छ भारत अभियान में वार्ड स्तर पर महिला शौचालय बनाने की पहल हो अथवा लोक सेवा गारंटी की तरह पार्षद, विधायक सांसद भी नियम-कायदों में बंधे रहें।
हर ग्राम पंचायत पर पंचायत भवन होता है। पंचायत जितनी आबादी वार्डों में भी है। इसलिए वार्ड भवन भी बनाए जाएं। इन वार्ड भवनों में ग्राम सेवक की तरह निगम कर्मचारी को नियुक्त किया जाए। जन्म मृत्यु प्रमाण-पत्र के साथ भवन निर्माण नियमन की प्रक्रिया भी शुरू हो ताकि लोगों को निगम पार्षदों के पास भटकना पड़े।
सरकार की इस योजना में हर कर्मचारी को हर परिवेदना को समय पर निपटाना होता है, अपील का भी सिस्टम है। ऐसे ही पार्षद-विधायकों के लिए भी ऐसी गाइडलाइन बने। वे समस्याओं का समय पर समाधान कराएं। उनका अपीलीय अधिकारी मेयर को तथा विधायकों का अपीलीय अधिकारी मुख्यमंत्री को बनाया जाए।