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मिनीमम स्टैंडर्ड के बिना ही आयुर्वेद विवि ने दी कॉलेज को मान्यता

7 वर्ष पहले
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राजस्थानआयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर ने सैन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन के नियमों को ताक में रखकर मिनीमम स्टैंडर्ड के बिना ही चौमू के महात्मा ज्योतिबा फूले पिलानी के शेखावाटी आयुर्वेद कॉलेज को मान्यता देने का मामला सामने आया है। यह खुलासा निरीक्षकों द्वारा की गई निरीक्षण रिपोर्ट में हुआ है। जांच में सामने आया कि वर्तमान में दोनों कॉलेज के पास रनिंग अस्पताल ही नहीं है। आउटडोर इनडोर के मरीजों का रिकार्ड गलत तरीके से तैयार किया जाता है। साथ ही स्टाफ भी निर्धारित मानदंड के अनुसार नहीं है। जिससे विश्वविद्यालय की साख पर क्वालिटी एज्यूकेशन देने पर सवाल उठने लगे है। महात्मा ज्योतिबा फूले चौमू ने बैचलर इन आयुर्वेद, मेडिसन एंड सर्जरी (बीएएमएस) में 100 सीट के लिए आवेदन किया है।

सीसीआईएम के पूर्व अध्यक्ष डॉ.वेदप्रकाश त्यागी ने बताया कि भारत सरकार की अनुमति से सैन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) नई दिल्ली ने 19 जुलाई 2012 को मिनीमम स्टैंडर्ड नोटिफाइड किया है, जिसकी पालना अनिवार्य है। राजस्थान में आयुर्वेदिक कॉलेजों को मान्यता देने का गौरखधंधा चल रहा है। इधर, सिंडिकेट सदस्य वैद्य हरिनारायण स्वामी का कहना है कि राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक स्तर पर एक्ट मिनिमम स्टेंडर्ड के विपरीत निम्न स्तर के कॉलेजों को मान्यता दी जा रही है। एकेडेमिक काउंसिल में बार-बार ठीक करने के लिए प्रस्ताव रखे जाते है, लेकिन नियमानुसार पालना नहीं की जाती।

^हमने प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर मान्यता दी है। एक बार फिर से दोनों कॉलेजों का निरीक्षण कराया जाएगा। चौमू के ज्योतिबा फूले आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता के लिए केन्द्र सरकार को भेजा है, जबकि पिलानी के शेखावाटी आयुर्वेद महाविद्यालय पिछले पांच-छह साल से संचालित है। राज्य सरकार ने एनओसी जारी कर दी है। डॉ.राधेश्याम शर्मा, कुलपति,राजस्थान आयुर्वेद विवि जोधपुर

ये है खामियां

शेखावाटीआयुर्वेद कॉलेज

पिलानी : बीएएमएसके साथ आयुर्वेद नर्स-कंपाउंडर पाठ्यक्रम संचालित, रिकार्ड के अनुसार भवन नहीं, एक ही कमरे में व्यवस्था (लैब, म्यूजियम, विभागाध्यक्ष, कार्यालय), ऑडिटोरियम कॉमन रूम नहीं, लाइब्रेरी में कम छात्रों के बैठने की व्यवस्था, बैड की संख्या कम, क्लीनिकल पैथोलोजी, ऑपरेशन थिएटर एंड बायोकेमिस्ट्री लैब के साथ अलग से रिकवरी तथा स्टरल