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शिक्षकों को नौकरी से निकालने का आदेश रद्द

7 वर्ष पहले
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राजस्थानहाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी जस्टिस पीके लोहरा की खंडपीठ ने सोमवार को 187 अपील याचिका स्वीकार करते हुए तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 का परिणाम संशोधन होने के बाद मेरिट से बाहर होने वाले शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त करने के पंचायतराज विभाग के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही परिणाम संशोधन के बाद भी इन सभी शिक्षकों को सेवा से पृथक नहीं करने के भी आदेश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेशभर के सैकड़ों शिक्षकों को राहत मिली है।

याचिकाकर्ता मंजू चौधरी, रजनी, कमल कुमार महावर अन्य की ओर से अधिवक्ता डॉ. नुपूर भाटी, कुलदीप माथुर, कैलाश जांगिड़, विकास बिजवाणिया सहित विभिन्न अधिवक्ताओं ने खंडपीठ के समक्ष पैरवी करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता विधिवत प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे तथा नियमित रूप से सेवा कर रहे हैं। डॉ. भाटी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में निस्तारित विकास प्रताप सिंह बनाम छतीसगढ़ सरकार राजेश कुमार बनाम बिहार सरकार के मामले में दिए फैसलों को जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी थी। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एसएस लदरेचा ने पैरवी की। शेष| पेज 10



खंडपीठने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी 187 अपील याचिकाएं स्वीकार करते हुए पंचायतराज विभाग द्वारा 30 अगस्त 2013 को मेरिट संशोधन से बाहर होने वाले याचिकाकर्ताओं को सेवा से पृथक करने के आदेश को अपास्त कर दिया। कोर्ट ने पुन: संशोधन के बाद भी इन सभी याचिकाकर्ताओं को सेवा में बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

फैक्ट फाइल:

-24 फरवरी, 2012 को पूरे प्रदेश में पंचायतराज विभाग ने जिलेवार शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की।

-2 जून 2012 को परीक्षा आयोजित हुई।

-2012 सितंबर में मेरिट में आने वाले सफल अभ्यर्थियों को प्रथम नियुक्ति दी गई।

-30 अगस्त 2013 को पंचायतराज विभाग ने आदेश जारी कर मेरिट से बाहर रहे सभी शिक्षकों को सेवा से पृथक करने के लिए कहा।

-2013 दिसंबर में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर सरकार के आदेश को उचित ठहराया।

-2014 जनवरी में एकलपीठ के आदेश विरुद्ध खंडपीठ में अपील दायर की गई जिसे स्वीकार करते हुए पंचायतराज विभाग के आदेश को स्टे किया, जो अभी तक चल रहा था।