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पिछली सरकार ने 1999 के बाद की कॉलोनियों के लिए दी थी छूट

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. राज्य सरकार ने 17 जून 1999 के बाद कृषि भूमि पर अवैध रूप से काटी गई कॉलोनियों के भूखंडों के पट्टे जारी करने के लिए पूर्व में दी गई छूट समाप्त कर दी है। अब जेडीए या संबंधित स्थानीय निकाय ऐसे भूखंडों का पट्टा तभी जारी करेगा, जब खरीद का एग्रीमेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी सहित जरूरी दस्तावेज पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग से पंजीकृत करवाए गए हों। पंजीकरण डीएलसी दर के आधार पर होगा।
एग्रीमेंट के पंजीकरण के लिए डीएलसी दर के छह फीसदी या पांच फीसदी (महिलाओं के लिए) राशि के बराबर शुल्क लगेगा, जबकि पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए डीएलसी दर के दो प्रतिशत के बराबर राशि देनी होगी। नया नियम लागू होने से पट्टा लेने के लिए भूखंड धारकों को हजारों रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
अफसरों ने नहीं की स्पष्ट व्याख्या: राठौड़
हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नाथूसिंह राठौड़ के अनुसार 18 नवंबर को जारी परिपत्र में अपंजीकृत एग्रीमेंट के आधार पर पट्‌टे नहीं दिए जाने का उल्लेख किया गया है। पावर ऑफ अटाॅर्नी से रजिस्टर्ड दस्तावेज के आधार पर पट्टे बनाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन जेडीए इसे भी पंजीकृत करवाने के लिए कह रहा है। परिपत्र के मार्गदर्शन बिंदुओं को स्पष्ट नहीं कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
अफसर बोले- अंतिम रजिस्टर्ड, दस्तावेज के आधार पर पट्टा
प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत जारी छूट समाप्त हो गई है, लेकिन नगरीय विकास विभाग ने पुन: पत्र भेज कर इसे स्पष्ट किया है। अंतिम रजिस्टर्ड दस्तावेज के आधार पर पट्‌टे बनाए जा रहे हैं। -ओपी बुनकर, उपायुक्त, जेडीए