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- निजी अस्पताल में हीटर से झुलसी नवजात की मां ने ठोका 50 लाख का दावा, सर्किट बेंच ने डॉक्टरों को नोटिस
निजी अस्पताल में हीटर से झुलसी नवजात की मां ने ठोका 50 लाख का दावा, सर्किट बेंच ने डॉक्टरों को नोटिस भेजा
मसूरियास्थित रामदेव अस्पताल में 16 फरवरी, 2013 को हीटर की गर्म हवा से झुलसी बच्ची की मां ने हॉस्पिटल संबंधित डॉक्टरों पर 49.85 लाख रुपए का दावा ठोका है। इस मामले में उपभोक्ता मंच की स्टेट सर्किट बेंच के सदस्य लियाकत अली ने अस्पताल प्रशासन, डॉ. डीके रामदेव, डॉ. शैली बलारा आदि को नोटिस जारी किए हैं। गौरतलब है कि बच्ची का जन्म घटना से चंद घंटे पहले ही हुआ था। उसकी स्थिति नाजुक होने की बात कहते हुए उसे मां से अलग रखा गया। इस दौरान निजी अस्पताल का स्टाफ उसे हीटर के सामने लिटा कर भूल गया। लगातार गर्म हवा के थपेड़ों से उसका चेहरा और हाथ बुरी तरह झुलस गए थे। स्थिति ऐसी हो गई कि तीन अंगुलियां शरीर से अलग हो गईं और बाकी अंगुली अंगूठे का भी आधा भाग ही रह गया। इससे मासूम के शरीर में परमानेंट डिसएबिलिटी हो गई थी। इस मामले को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उजागर किया था।
बच्ची अपने माता-पिता खेमे का कुआं निवासी ज्योति जितेंद्र प्रजापत की पहली संतान थी। मासूम की मां ज्योति ने जिला उपभोक्ता मंच में अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ 49.85 लाख का दावा ठोका था। राशि के हिसाब से मामला जिला मंच के क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण मामला उपभोक्ता मंच की स्टेट सर्किट बेंच में लगाया। ज्योति ने अपने परिवाद में बताया कि बच्ची को अहमदाबाद के स्टर्लिंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां बच्ची के शरीर खराब हुए अंगों की प्लास्टिक सर्जरी कराई। इस पर चार लाख रुपए खर्च हुए। परिवाद में इस खर्च के साथ बच्ची को पहुंची पीड़ा की क्षतिपूर्ति के पेटे 20 लाख, बच्ची की परमानेंट डिसएबिलिटी की क्षतिपूर्ति के पेट 15 लाख, मां को हुई मानसिक पीड़ा परिवार को हुए आर्थिक नुकसान के पेटे पांच-पांच लाख और परिवाद व्यय के 80 हजार रुपए दिलाने का आग्रह किया है।