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फिश हैचरी में नहीं पनप पाई गम्बूजियां मछलियां

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. मलेरिया से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग का गम्बूजियां मछलियां विशेष हथियार हैं। इसलिए मलेरिया फैलते ही स्वास्थ्य विभाग को सबसे पहले इन्हीं मछलियों की याद आती है, लेकिन स्थानीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा सीएचसी परिसर में बने फिश हैचरी को देखकर लगाया जा सकता है। फिश हैचरी गम्बूजिया मछलियों को पनपाने सरंक्षण करने के लिए बनाया गया था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी बाप सीएचसी परिसर में बनाए गए इस प्रजनन केंद्र में गंबूजिया खुद ही बेमौत मर चुकी है। वर्तमान में फिश हैचरी में तो पानी है ही गम्‍बूजि‍या।

बाप मलेरिया हाई रिस्क जॉन में शुमार होने पर करीब पांच साल पहले गंबूजिया मछलियों को पनपाने के लिए सीएचसी परिसर में फिश हैचरी का निर्माण करवाया गया था। करीब 15 गुणा 15 साइज बना यह तरणताल दो भागों में विभक्त है। छाया के लिए ऊपर टीन शेड तथा तरणताल के ठीक ऊपर लोहे की जाली लगाई गई हैं ताकि शिकारी पक्षियों से गम्बूजियां सुरक्षित रहे। बताया जा रहा हैं कि शुरूआती चरण में यहां मछलियां डाली गई थी, लेकिन उसके बाद इसे भूला दिया गया। यही कारण हैं कि आज वह लावारिस अवस्था में मछलियां विहीन सूखा पड़ा हैं।

ठेकेदार को मरम्मत के लिए कहा गया है

जोधपुर से आई कंस्ट्रक्शन की टीम ने ही इसका निर्माण किया था। इसका फर्श फट गया हैं, जिस कारण उसमें पानी नहीं ठहरता हैं। 15-20 दिन पूर्व ही उसे खाली कर सुखाया हैं। अभी सीएचसी परिसर में धर्मशाला का निर्माण चल रहा है। उसके ठेकेदार को फर्श की मरम्मत करने के लिए कहा गया है। डॉ.कैलाश मोदी, बीसीएमओबाप।

(अस्पताल परिसर में बना गंबूजिया मछलियां रखने के टेंक में जमी रेत)