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खुले में जलाया बायोवेस्ट

7 वर्ष पहले
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कस्बेके निकटवर्ती पिचियाक उप स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली दवाइयां जलाने का मामला सामने आया है। नियमों के विपरीत नष्ट की गई इन दवाओं में कई तो अभी अवधिपार भी नहीं हुई थी। इतना ही नहीं, मेडिकल बायोवेस्ट को खुले में जलाने की बजाय जोधपुर स्थित बायोवेस्ट नष्ट करने के लिए लगे प्लांट पर जलाया जाना चाहिए था। लेकिन स्टाफ ने अस्पताल परिसर में ही इंजेक्शन, वैक्सीन, टेबलेट, ग्लूको स्ट्रीप, सिरप, ओआरएस पाउडर इत्यादि जलाए और वो भी आधे-अधूरे छोड़ दिए गए। इनमें से कई दवाओं के तो सिर्फ लेबल या प्लास्टिक ही जले। मौके पर मिले अवशेष देखने पर सामने आया कि इनमें से कुछ दवाएं अवधिपार हो चुकी थीं, लेकिन कई ऐसी भी थी, जिनकी एक्सपायरी डेट 2015 या 2016 तक है। ऐसी दवाओं में अधिकांश वैक्सीन थीं। जानकारों के अनुसार किसी भी अस्पताल या उप स्वास्थ्य केंद्र पर जो भी दवा एक्सपायर हो जाती है, उसकी सूचना कार्यालय में दी जाती है। इसके बाद विभाग उन दवाओं को जोधपुर मंगवाकर बायोवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर नष्ट करता है।

^एक्सपायरी डेट की दवा को नष्ट करना पड़ता है। इसके लिए इन दवाओं को खड्डा खोदकर दबाना या जलाया जाता है, लेकिन इसके लिए अनुमति लेनी जरूरी है। पिचियाक उप स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं को नष्ट करने के संबंध में कोई अनुमति नहीं दी गई है। आधी अधूरी दवा जलाना गलत है और जो वैक्सीन एक्सपायर नहीं हुई, उसकी जांच करवाई जाएगी।

डॉएस एन जीनगर, बीसीएमओ

^वैक्सीन खुलने के बाद उसका 28 दिन तक उपयोग किया जा सकता है। बिना अनुमति दवाओं को जलाना गलत है। इनमें भी जो वैक्सीन जलाई गई है, वे जलाने से पहले खराब थी या जलाने की वजह से खराब हुई, इसकी भी जांच की जाएगी। इसके अलावा सितंबर 2014 की एक्सपायरी वाली दवाओं को भी जलाया नहीं जा सकता, क्योंकि इन दवाओं को महीने के अंत तक उपयोग में लिया जा सकता है। बायोवेस्ट को खुले में जलाना भी गलत है। पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।

डॉ.नरेंद्र सक्सेना, सीएमएचओ,जोधपुर

बिलाड़ा. आधी-अधूरीजली पडी दवाईयां। (इनसेट) ग्लूको स्ट्रीप भी जलाने के बाद बिखरी पडी थी।