धुंधाड़ा. पश्चिमी राजस्थान की मरुगंगा के नाम से पहचानी जाने वाली लूणी नदी पिछले दो दशक से दूषित हो रही है। बांडी नदी से रहे इस दूषित पानी की वजह से पाली जिले के करीब 60 किमी के बहाव क्षेत्र में तो किसानों की कृषि पैदावार बंद हो चुकी है, वहीं धुंधाड़ा और बाड़मेर जिले के कई गांव-कस्बों सहित इसके अन्य इलाकों में भी लंबे समय से कृषि उपज लगातार बंद हो रही है।
बालोतरा में रंगाई छपाई की फैक्ट्रियों से निकलकर लूणी नदी में जा रहे रासायनिक पानी से नदी के बहाव क्षेत्र में हो रहे नुकसान को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का असर बालोतरा में तो दिखाई दे रहा हैं, लेकिन जोधपुर जिले के धुंधाड़ा इलाके में पाली जिले से बांडी नदी में होते हुए लूणी नदी में रहे रासायनिक पानी से पूरे कृषि क्षेत्र को दूषित कर रखा है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं, इस दूषित पानी का दुष्प्रभाव आसपास के इलाके समदड़ी, अजीत तक दिखाई दे रहा है। धुंधाड़ा और इसके आसपास के इलाकों में लगातार बर्बाद हो रहे कृषि क्षेत्र से किसान कर्ज में डूबे हुए हैं और इसी से आहत किसानों ने किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर ली है। इन किसानों का कहना है कि धुंधाड़ा कस्बे की लूणी नदी जो समदड़ी-बालोतरा होते हुए कच्छ की खाड़ी तक जाती है, इसका अस्तित्व भी संकट में पड़ चुका है।
उल्लेखनीय है कि गत दिनों पाली जिले की फैक्ट्रियों से निकला केमिकलयुक्त पानी बांडी नदी से होते हुए लूणी नदी में पहुंचा था। यही पानी बाड़मेर जिले के रामपुरा होते हुए अजीत तक तकरीबन 4 हजार से अधिक कृषि एवं पेयजल के स्रोत कुओं को दूषित कर चुका है। ऐसे पानी की वजह से लूणी नदी के किनारे के खेतों में देशी सब्जियों की पैदावार ठप हो गई है।
(लूणीनदी में बने नाले से बहता बांडी नदी से रहा दूषित पानी। फोटो| पुखराज सोलंकी)