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- पार्षदों के कहने पर महापौर ने 13 वार्ड सफाई प्रभारी बदले, 4 को किया एपीओ
पार्षदों के कहने पर महापौर ने 13 वार्ड सफाई प्रभारी बदले, 4 को किया एपीओ
{ निगम ने 17 वार्डों के सफाई प्रभारियों को किस कारण से हटाया है?
आेझा:पार्षदोंने कहा था कि सफाई प्रभारी काम ठीक से नहीं कर रहे हैं।
{ क्या इनको वार्ड से हटाने से सफाई व्यवस्था ठीक हो जाएगी?
आेझा:यहतो पार्षद ही तय करेंगे। मुझसे बदलने को कहा तो बदल दिए।
{ क्या आप मान रहे कि इन 17 वार्डों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है?
आेझा:सफाईकी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है। अगर अच्छा काम नहीं करेंगे तो वापस हटा देंगे।
अच्छा काम नहीं करेंगे तो वापस हटा देंगे
महापौर घनश्याम आेझा से सीधी बात
...क्या गारंटी, हटाए प्रभारी दूसरे वार्ड में काम करेंगे
30से 35 साल तक निगम में सफाई व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हटाना ही था तो सभी 17 वार्डों में नए सफाई प्रभारी लगाते। जिस सफाई प्रभारी की कार्यशैली से पार्षद संतुष्ट नहीं है तो वह दूसरे वार्ड के पार्षद को कैसे संतुष्ट कर पाएगा? क्या निगम ऐसे सफाई प्रभारियों से कोई शपथ पत्र या गारंटी ले रहे हैं। (सेवानिवृत्तएक्सईएन (गेराज) मुरलीधर धोकलिया, सेवानिवृत्त मुख्य सफाई निरीक्षक सत्यनारायण गहलोत राजेश्वरसिंह सोलंकी की प्रतिक्रिया।)
इन्फ्रा रिपोर्टर| जोधपुर
भाजपाबोर्ड की पहली बजट बैठक के दो दिन पहले पार्षदों की अनुशंसा पर महापौर के अनुमोदन के पश्चात सीईआे ने 17 वार्डों के सफाई प्रभारी हटा दिए हैं। इनमें से 13 को दूसरे वार्डों में लगाया गया है, जिनमें से चार एपीआे चल रहे थे। जबकि चार वार्डों के सफाई प्रभारियों को एपीआे किया गया है। एक ओर जहां समितियों के चयन को लेकर महापौर अभी कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं वहीं मात्र दो महीने में ही पार्षदों के दबाव में 17 वार्ड के सफाई प्रभारियों को बदलने से निगम बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
...तोक्या सफाई व्यवस्था चरमरा गई
महापौरघनश्याम आेझा शहर में एकांतरे डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन का शुभारंभ कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मात्र दो महीने में ही 65 में से 17 वार्डों के पार्षद सफाई प्रभारी के काम से असंतुष्ट हैं तो शहर में सफाई व्यवस्था कैसी है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।