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उम्मेद अस्पताल

6 वर्ष पहले
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उम्मेद में प्रतिदिन औसतन ६७ सालाना 24000 प्रसव होते हैं। जो गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से दोगुने हैं।

1 40 बैड के लेबररूम को 100 बैड करने के लिए 2 करोड़ खर्च। साल लगा। (अभी 82 बैड ऑपरेट हैं)

2 लेबररूम को एसी बनाया। दीवारों पर एंटी-इंफेक्शनल पेंट किया।

3 लेबररूम से ही एक एंटीनेटल वार्ड को जोड़ा, जहां गर्भवतियों को रखा जा सके। लेबररूम में परिजनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई।

4 सीनियर डॉक्टर्स की शाम को फ्लोर ड्यूटी लगाने की व्यवस्था कड़ाई से लागू की गई।

मनीला के डॉ. जोस फेबिला मेमोरियल हॉस्पिटल मे 2003 में रोजाना 88 बच्चे जन्म लेते थे। १० सालों में मनीला में यह औसत गिरकर ६५ तक गया। बीबीसी ने अक्टूबर-13 में इसे दुनिया का व्यस्तम अस्पताल बताया था। 2012 में अमेरिका के जीव दया फाउंडेशन की रिपोर्ट ने भारत में सर्वाधिक प्रसव वाले अस्पतालों की सूची में गुहावाटी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सालाना 13527, नागपुर मेडिकल कॉलेज में १११२७ प्रसव होना बताया। यानी देश और दुनिया के किसी भी अस्पताल में सबसे ज्यादा प्रसव उम्मेद अस्पताल में हो रहे हैं।

उम्मेद अस्पताल की ख्याति एवं व्यवस्थाओं को इसी प्रकार बनाए रखने के लिए एमडीएम हॉस्पिटल में तैयार नए जनाना अस्पताल में इसी माह प्रसव सुविधा प्रारंभ होगी। अभी ओपीडी चल रही है।

प्रसूताओं की लगातार मौतों के बाद सरकार ने तीन कमेटियां बनाईं। इनके सुझाव जस के तस लागू किए।

जनवरी 2011 में 1683 प्रसव हुए थे। 12 फरवरी से संक्रमण से प्रसूताओं की मौतें शुरू हुई। अस्पताल में प्रसव की संख्या घटने लगी। फरवरी में यह 1293, मार्च में 818, अप्रेल में 869, मई में 942, रह गई। जून में प्रसव की संख्या ने एक हजार का आंकड़ा (1074) पार किया। 2011 में प्रतिदिन प्रसव का औसत पचास से भी कम रहा। इन दिनों प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) आउटडोर में आने वाले गर्भवतियों की संख्या भी आधी रह गई थी।

मनोज वर्मा| जोधपुर

@manojverma044

\\\"सरकारीसिस्टम का कुछ नहीं हो सकता\\\' जैसे जुमले को उम्मेद अस्पताल ने खारिज किया है। 4 साल पहले फरवरी-मार्च 2011 में संक्रमित ग्लूकोज से प्रसूताओं की मौतों के चलते चर्चा में आए इस 100 साल पुराने अस्पताल ने व्यवस्थाओं में ऐसे बदलाव किए कि आज दुनिया में सर्वाधिक प्रसव होते हैं। रोजाना औसतन 69, सालाना 25 हजार से भी ज्यादा। बड़ी उपलब्धि, मातृ मृत्यु दर को प्रदेश के अन्य बड़े अस्पतालों की तुलना में नीचे लाना भी है। 2014 में यहां 25,113 प्रसव पर 62 प्रसूताओं की मौत हुई। ये आंकड़ा जयपुर में महिलाओं के सबसे बड़े जनाना अस्पताल से कम है। वहां 2013 में 16,542 प्रसव हुए लेकिन 318 प्रसूताओं की मौते हुई थीं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एसएन मेडिकल कॉलेज की एक रिपोर्ट के अनुसार उम्मेद अस्पताल में हर माह पांच सौ से ज्यादा गर्भवतियां दूर-दराज के इलाकों से रैफर होकर आती हैं। इनमें से 48 फीसदी मामले जटिल होते हैं। उम्मेद अस्पताल के डॉक्टर्स नर्सेज संसाधनों की कमी के बावजूद अपना काम बखूबी कर रहे हैं। सरकार ने यहां का दबाव कम करने के लिए एमडीएमएच में बने नए जनाना अस्पताल में 100-100 बैड शिशु रोग गायनी विभाग के लिए रखे गए हैं।

चार साल पहले प्रसूताओं की मौत के लिए बदनाम, अब दुनिया के सर्वाधिक प्रसव

2011 में प्रसूताओं की मौतों के बाद हर दिन टीमों के दौरे, हालात सुधारने का चौतरफा दबाव था। लोगों का भरोसा बनाए रखना चुनौती थी। डॉक्टर परेशान थे। उन्हें बूस्ट-अप करना था। मुख्य लेबररूम को बंदकर वैकल्पिक शुरू किया। मेडिकल स्टाफ के अलावा किसी का भी प्रवेश बंद किया। सीनियर डॉक्टर सुबह से शाम ड्यूटी पर रहते। फ्लोर ड्यूटी व्यवस्था अलग लागू की। परिजनों की भीड़ रोकने के लिए कड़ाई बरती। कर्मचारियों को भी पाबंद किया गया। विरोध भी हुआ। लेकिन यह सब जरूरी था। लेबररूम, ओटी सहित अन्य जगहों में संक्रमण का स्तर जांचने के लिए हर दिन रिपोर्ट शुरू की गई। मैन पावर और संसाधन, मरीजों की तादाद देखें तो कहीं कम हैं। हम फिर भी क्वालिटी ट्रीटमेंट के लिए जुटे हैं।

एक अनोखी

सक्सेस स्टोरी

वर्ष प्रसव प्रतिदिन

20111660945

20122116857

20132422367

20142511369

मनीला की \\\"बेबी फैक्ट्री\\\' से ज्यादा

...और यूं बदल गई तस्वीर

इन्फेक्शन प्रूफ वार्ड, कड़े नियम

अनुशासन, बड़े बदलाव से वापसी

मौतों के बाद आधे रह गए प्रसव

टूटने लगा था भरोसा

मरीजों में अविश्वास, डॉक्टरों में हताशा थी: डॉ. नरेंद्र छंगाणी

तत्कालीन अधीक्षक