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पेंशन देने को पैसे नहीं तो सरकार खुद को दिवालिया घोषित करे: हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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बीकानेरस्थित केशवानंद भारती राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के करीब 1100 सेवानिवृत्त प्रोफेसरों और कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास पेंशन का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है तो अपने आपको दिवालिया घोषित कर दे। याचिकाकर्ता सुरजाराम सुथार की ओर से अधिवक्ता मुकेश व्यास द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश कोठारी ने विश्वविद्यालय और सरकार द्वारा पेंशन नहीं देने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बताने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि इस लड़ाई में भले ही पेंशनर भूखे मर जाएं, इसकी किसी को परवाह नहीं है।

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वित्तविभाग की ओर से विश्वविद्यालय को पेंशन के लिए अनुदान नहीं दिए जाने की पॉलिसी बताए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह कैसी बेहूदा नीति है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा तलब किए जाने पर वित्त विभाग के प्रमुख सचिव पीएस मेहरा, कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सम्पतराम और विश्वविद्यालय के कुलपति संभागीय आयुक्त शबीर कुमार अदालत में पेश हुए। विश्वविद्यालय द्वारा फंड की कमी बताते हुए कहा गया कि सरकार से अनुदान नहीं मिलने पर पेंशन का भुगतान रोका गया है। इसे अदा करने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि विश्वविद्यालय स्वायत्तशासी संस्था है और पेंशन का भुगतान करना भी उसके जिम्मे है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए दोनों पक्षों को अपने जवाब के संबंध में शपथ पत्र पेश करने के आदेश देते हुए सुनवाई लंच तक स्थगित कर दी। लंच के बाद सुनवाई करते हुए जस्टिस डॉ. कोठारी ने वित्त विभाग की ओर से दिए गए शपथ पत्र पर कहा कि इसमें कही भी पाॅलिसी का जिक्र नहीं है। उन्होंने दाेनों को इस मसले को अपने स्तर पर सुलझाने के निर्देश दिए। इस मामले में अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।