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संस्कृति को बचाना है तो बच्चों को बनाए संस्कारवान : गीतू बाईसा

7 वर्ष पहले
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उपखंडक्षेत्र के अरटिया कलां गांव में सत्य-प्रेम-करुणा संस्थान जोधपुर की ओर से माताजी के मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा शाम को नैनी बाई रो मायरो का सात दिवसीय आयोजन चल रहा है। इसमें आसपास के गांवों के लोग भागवत सुनने रहे है। भागवत कथा के तीसरे दिन पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए साध्वी गीतू बाईसा ने कहा कि मां ही एक बच्चे में नैतिक चारित्रिक गुण दे सकती है। साध्वी ने पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ रहे प्रचलन पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाना है तो बच्चों को संस्कारवान बनाएं। उन्होंने मां को देवता का रूप देते हुए कहा कि मां विधाता का दिया हुआ अनमोल र| है। भगवान ने मां को सारे गुण दे रखे है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि हमारी संस्कृति कहती है कि सुबह उठते ही पहले धरती मां को प्रणाम कर हाथ दर्शन करें। इसके बाद मां-बाप को प्रणाम करें। स्कूल में गुरुजनों को प्रणाम करें। मां ऐसी सीख बच्चों को दें। साध्वी ने कहा कि आज स्कूलों में संस्कारों की कम, जीविका की शिक्षा ज्यादा ही दी जा रही है। छोटा बच्चा केवल मां की भाषा ही समझता है, इसलिए बच्चे की पहली गुरु होने के नाते मां उसे ओजस्वी, तेजस्वी संस्कारवान गुण दें। जिन बच्चों में संस्कार वाले गुण होंगे। वे ही आगे बढ़ेंगे। साध्वी ने चिंता जताते हुए कहा कि भावी पीढ़ी संस्कृति भूलती जा रही है। बच्चों को संस्कार नहीं मिल रहे है। इसलिए वे पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागे जा रहे है। शाम को नैनी बाई रो मायरो में भी गांव के श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस दौरान कार्यकर्ता गोराराम जाखड़, हुक्माराम, राधेश्याम, मांगीलाल, लादुराम टेलर सहित कई जने मौजूद थे।

भोपालगढ़. उपखंडक्षेत्र के अरटिया कलां गांव में भागवत में प्रवचन देती साध्वी गीतु बाईसा।