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बाल विवाह निरस्त करवाने की लंबी सुनवाई निराश हो किशाेरी ने किया आत्महत्या का प्रयास

7 वर्ष पहले
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अपना55 साल के अधेड़ के साथ हुआ बाल विवाह निरस्त करवाने के लिए एक साल से अदालत के चक्कर काटकर परेशान एक किशोरी ने मंगलवार को नींद की गोलियां खाकर जान देने का प्रयास किया। समय रहते परिजन उसे एमजीएच ले आए, जिससे उसकी जान बच गई। घर पर मिले सुसाइड नोट में उसने न्याय मिलने में हो रही देरी पति की धमकियों से परेशान होकर खुदकुशी करने की बात लिखी।

किशोरी ने सुसाइड नोट में लिखा कि मंगलवार को उसकी कोर्ट में पेशी थी, लेकिन जज के छुट्टी पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। इससे वह निराश हो गई। इधर, पति भी उसे बार-बार धमकियां दे रहा था। उसने आरोप लगाया कि न्याय नहीं मिलने के कारण उसने खुदकुशी की ठानी। किशोरी के नींद की गोलियां खाने की बात पता चलने पर परिजनों ने उसे एमजीएच में भर्ती कराया।

सुसाइड नोट में लिखा

न्याय मिलने में देरी से निराश हूं

एक साल से पारिवारिक न्यायालय में चल रहा केस

माता-पिता के विरोध के बावजूद दादा ने करवाया बाल विवाह

किशोरी के पुनर्वास में सहयोग कर रही सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी कृति भारती ने बताया कि माता-पिता के विरोध के बावजूद दादा ने महज 14 साल की उम्र में 17 फरवरी 2012 को जैसलमेर के भारेवाला निवासी रामचंद्र पंवार (55) के साथ उसका बाल विवाह करवाया दिया। जबकि रामचंद्र की यह दूसरी शादी थी। किशोरी की मर्जी के बिना रामचंद्र ने जबरन उसे डेढ़ साल तक अपने साथ रखा। इसके बाद हिम्मत जुटाकर वह उसके चंगुल से निकल माता-पिता के पास गई। फिर करीब एक साल पहले किशोरी ने बाल विवाह निरस्त कराने के लिए पारिवारिक न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था।