जोधपुर. जेडीए नगर निगम की तंगहाली के चलते जोधपुर शहर में अरबन ट्रांसपोर्ट का दीर्घकालीन विजन लक्ष्य तैयार नहीं हो सका है। जोधपुर के यातायात का मास्टर प्लान तैयार करने वाला जेडीए लाखों रुपए खर्च करने के चार साल बाद भी उसकी महत्वपूर्ण सिफारिशों का क्रियान्वयन नहीं कर पा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जोधपुर को जेएनएनयूआरएम में शामिल नहीं करना भी इसकी असफलता का बड़ा कारण रहा।
नेशनल अरबन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी के तहत वर्ष 2010-11 में जोधपुर का कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) तैयार किया गया था। इसमें शहर में वर्तमान की यातायात स्थिति, उनकी समस्याओं, चुनौतियों और संभावित समाधान को रेखांकित किया गया था। राज्य सरकार के आदेश पर जेडीए ने जोधपुर के यातायात का मास्टर प्लान तैयार करने का जिम्मा अमरीकी कंपनी विलंबर स्मिथ को सौंपा था।
इस कंपनी ने मार्च 2010 में शहर की यातायात स्थिति का विस्तृत सर्वे कर ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट जेडीए के तत्कालीन आयुक्त गौरव गोयल को सौंपी थी, लेकिन चार साल गुजरने के बाद भी तो सरकार आैर ही स्थानीय निकाय ने इसकी गंभीरता को समझा। ऐसे में आधी-अधूरी तैयारी के साथ शहर में शुरू की गई लग्जरी बस सेवा भी पैसों के अभाव में दम तोड़ गई।
अमरीकी कंपनी ने सीएमपी में कुछ प्रमुख सिफारिशों को तत्काल लागू करने की जरूरत बताई थी। इनमें प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार थीं-
वर्ष 2010-11 में तैयार शहर का कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान कागजों में
बेहतर यातायात की दृष्टि से सीएमपी में 12 मोबिलिटी कॉरिडोर चिह्नित कर विकसित करने का सुझाव दिया, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
सन् 2030 तक 17 सौ बसें शहर के विभिन्न मार्गों पर चलाने का सिफारिश की थी। राज्य सरकार ने एक साल पहले ही शहर के लिए 10 करोड़ लागत की 39 बसें खरीदी थी, लेकिन प्रशासनिक विफलता के कारण सिर्फ 10 बसें ही सड़क पर उतर सकी। ऐसे में 29 बसें वर्कशॉप में बेकार हो गईं। एक साल में इन बसों से सरकार को 4 करोड़ रु का घाटा हुआ।
नई बसों के संचालन के लिए नए बस रूट, टर्मिनल सहित 320 बस शेल्टर स्थापित किए करने का सुझाव भी सर्वे रिपोर्ट में था, लेकिन चार साल बाद दो दर्जन बस शेल्टर ही स्थापित हो पाए हैं।