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अपनों ने छोड़ा लावारिस तो दूसरी ने ‘मां’ बन पिलाया दूध

7 वर्ष पहले
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मथानिया | एकमहिला ने तो नवजात को जन्म देकर सूनसान इलाके में मरने के लिए छोड़ दिया, लेकिन होनी को शायद कुछ ओर ही मंजूर था। पत्थर के नीचे दबे एक शिशु की आवाज सुनकर लोगों ने उसे संभाला और उन्होंने उसे मथानिया अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में भी भूख से बिलखते मासूम की आवाज सुनकर एक महिला का मातृत्व जाग उठा और उन्होंने उसे अपना दूध पिलाकर सिर्फ उसे ममता का अहसास कराया, बल्कि उसे नई जिंदगी भी दे दी। डॉक्टरों के अनुसार शिशु की हालत सामान्य है। बाद में उसे उम्मेद अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में उसे लवकुश संस्थान को सौंप दिया गया। करवड़ थानाधिकारी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब सात बजे मथानिया के निकटवर्ती जुड़ गांव की सरहद पर भीलों की ढाणियों के पास स्थित एक खेत में नवजात की आवाज सुनकर लोग उस ओर दौड़े। वहां लोगों को मासूम शिशु पत्थर के नीचे दबा हुआ मिला। तब तक मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरत-फुरत में लोगों की मदद से उसे मथानिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, तो डॉक्टर सुल्तानसिंह की टीम ने भी उसका तत्काल उपचार किया। इसी दौरान पास के वार्ड में भर्ती बालरवा निवासी अनुदेवी प|ी श्रवण कुमार, जिसने सोमवार रात को ही सीएचसी में एक बच्ची को जन्म दिया था, को मासूम के बारे में पता चला तो वो भी खुद को रोक नहीं पाई। अनुदेवी ने उस नवजात को सीने से लगाया और अपना दूध पिलाकर शिशु को ममता का अहसास कराया तो उसने भी रोना बंद कर दिया। यह दृश्य देखकर अस्पताल स्टाफ अन्य लोग भी भावुक हो गए। अस्पताल प्रबंधन ने प्राथमिक उपचार के बाद मासूम को जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर कर दिया। शिशु की सामान्य हालत को देखते हुए उसे लवकुश संस्थान के सुपुर्द कर दिया गया है। इस संबंध में करवड़ थाने में अज्ञात महिला के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।