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भास्कर पड़ताल| 3 साक्ष्य लविंद्र की बेकसूरी के

6 वर्ष पहले
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खेतासर के दामाद के हाथों कार हादसा, साथ बैठे दोस्त की मौत, उसी को आरोपी ठहरा दिया

सजा से बचने के लिए दोस्त के साथ दगा

न्यूबीजेएस कॉलोनी के लविंद्र सिंह (26) को गत वर्ष 21 जनवरी को जेडएसए कॉलोनी निवासी दोस्त प्रदीपसिंह पुत्र मदनसिंह अपने साथ जैसलमेर में एक शादी में शरीक होने के लिए ले गया। प्रदीपसिंह ने तेज स्पीड में कार ड्राइव करते हुए जैसलमेर से 20 किमी पहले भांगू गांव के पास पुलिया से भिड़ा दी। टक्कर लविंद्र की साइड में हुई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रदीप की साइड में एयरबैग था जो खुल गया और कार भी पूरी तरह सेफ रही। उसे कुछ चोटें ही आईं। 40 दिन पहले ही लविंद्र से ब्याहकर आई रेणुकंवर का सुहाग उजड़ गया। लविंद्र के कंधों पर ही माता-पिता, प|ी, तीन बहनों छोटे भाई के 8 सदस्यीय परिवार का खर्च चलाने का जिम्मा था। पिता को गर्भ में रहने के दौरान ही खो चुकी मासूम हर्षिता ने 8 माह बाद जन्म लिया। परिवार का बुरा समय यहीं खत्म नहीं हुआ। दोस्त प्रदीप ने पुलिस कार्यवाही से बचने के लिए जैसलमेर कोतवाली पुलिस को बताया कि कार लविंद्र चला रहा था। जवान बेटे की मौत से संज्ञाहीन हुए परिजनों से प्रदीप ने देह जल्दी ले जाने का बहाना बनाकर रिपोर्ट पर साइन भी करवा लिए। तत्कालीन एसएचओ ने भी लविंद्र को ड्राइवर मानकर मामले पर एफआर लगा दी। ये जानकारी जब रिटायर्ड फौजी पिता दयालसिंह को मिली तो उन्होंने जोधपुर रेंज आईजी, एसीपी जैसलमेर के पास जाकर प्रदीप के कार चलाने लविंद्र के निर्दोष होने की गुहार की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदीप भाजपा नेता शंभूसिंह खेतासर का दामाद है और उन्होंने प्रभाव दिखाकर मामला अपने अनुरुप करवाया है। प्रदीप ने उसी हादसे में मारे गए दोस्त पर दोष इसलिए मढ़ा ताकि वह 50 लाख रु. का क्लेम चुकाने से बच सके।

वृद्ध पिता की गुहार पर उच्चाधिकारियों ने मामले की दुबारा जांच करवाई। इसमें खेतासर के दामाद प्रदीप को दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर चालान पेश किया गया है। हालांकि उसे जमानत मिल गई। मृतक के परिवार को 50 लाख का क्लेम मिलने की उम्मीद भी जगी है। पूर्व में एफआर लगाने वाले जांच अधिकारी हैड कांस्टेबल ओमाराम को नोटिस देकर दो साल की वेतन वृद्धि भी रोकी है।

रेणु कंवर की मांग शादी के 40 दिन बाद ही उजड़ गई। मासूम हर्षिता तो जन्मी ही पिता की मौत के बाद।

कंपनी लविंद्र के परिजनों को क्लेम देती तो प्रदीप को चुकाना पड़ता।

प्रदीप ने खुद को जेल या जुर्माना हो इसलिए लविंद्र को फंसाया।

हादसे के 40 दिन पहले ही प्रदीप (बाएं)खुद लविंद्र को दूल्हा बनाने आया था।

चश्मदीदों ने भी इस बात की पुष्टि की।

नॉन ड्राइविंग सीट पूरी तरह नष्ट, इस पर था लविंद्र।

ड्राइवर सीट सुरक्षित थी, यहां का एयरबैग भी खुल गया था।

दयालसिंह, मृतकलविंद्र के पिता

अब भी मिल सकती है 50 लाख रु. की क्लेम राशि

दुर्घटनाग्रस्तकार का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस था। कंपनी प्रदीप की गलती मानते हुए लविंद्र के परिवार को उसकी सालाना आय और उम्र की गणना से करीब 17 गुणा क्लेम राशि दे सकती है। यह राशि करीब 50 लाख रुपए होती है।

शंभूसिंह खेतासर अपने दामाद प्रदीप को बचाना चाहता था। खेतासर उसके लोगों ने जांच को प्रभावित कर एफआर लगवाई। मुझे परिजनों को धमकाया गया। कई बार मेरेे परिवार का का पीछा किया गया।

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