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निगम अफसरों की मिलीभगत से सीज इमारतों में चल रहा था व्यापार, निरीक्षण में उजागर हुआ मामला

6 वर्ष पहले
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जोधपुर. सरदारपुरा जोन के मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई), संबंधित वार्ड का सफाई प्रभारी आैर अतिक्रमण प्रभारी इसमें मुख्य रूप से दोषी है। सीज इमारत इनकी शह के बिना खुल ही नहीं सकती। इसके अलावा प्रथम दृष्टया संबंधित जोन के एक्सईएन, एईएन जेईएन भी दोषी है, क्योंकि ये कभी भी बिना इजाजत या नक्शे के विपरीत निर्माण को मौके पर जाकर देखते ही नहीं। सीईआे हरिसिंह राठौड़ से जब पूछा तो बोले, इस संबंध में सफाई प्रभारी अतिक्रमण प्रभारियों को नोटिस दिया है, कार्रवाई भी करेंगे।

पार्किंग का अभाव, नक्शे के विपरीत निर्माण

मॉनिटरिंग कमेटी के आदेश पर निगम ने शहर में बनी 87 इमारतों को प्रथम दृष्टया अवैध मानते हुए चिह्नित किया था। 23 मार्च 2013 में हुए एक सर्वे में इन इमारतों में पार्किंग का अभाव आैर नक्शे के विपरीत निर्माण पाया गया। इस सूची में 19 पुरानी इमारतें भी शामिल की गई। तत्कालीन डीएलबी के अतिरिक्त निदेशक मनीष गोयल द्वारा किए सर्वे में 20 से 25 इमारतों को पूरी तरह अवैध ठहराया गया। तब यह फैसला लिया गया कि जिन इमारतों के मालिकों ने पार्किंग के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ा है, उन्हें तुरंत सीज किया जाएं। इसके साथ ही नक्शे के विपरीत जितनी अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया है, उन मंजिल को भी सीज करें। इनमें बिजली-पानी के कनेक्शन तक काटने के आदेश किए गए थे।