पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • प्रसूताओं की मौतों के लिए बदनाम अस्पताल बना मिसाल

प्रसूताओं की मौतों के लिए बदनाम अस्पताल बना मिसाल

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
उम्मेद अस्पताल के नए लेबर रूम में सारी आधुनिक सुविधाएं हैं।

वर्ष प्रसव प्रतिदिन

20111660945

20122116857

20132422367

20142511369

दुनिया के बाकी सब अस्पताल पिछड़े

{मनीलाके डॉ. जोस फेबिला मेमोरियल हॉस्पिटल मे 2003 में रोजाना 88 बच्चे जन्म लेते थे। लेकिन बीते 10 साल में औसत 65 रह गया।

{अमेरिका के जीवदया फाउंडेशन की रिपोर्ट में गुहावाटी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल सबसे ऊपर था। वहां सालाना 13,527 बच्चों का जन्म हो रहा था।

{जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में इस वक्त सालाना 25,000 बच्चों का जन्म हो रहा है।

^लोगों का अस्पताल पर भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। डॉक्टर परेशान थे। उन्हें बूस्ट-अप करने की जरूरत थी। इसके लिए हमने जो कदम उठाए उनका विरोध भी हुआ। लेकिन यह सब जरूरी था।’ -डॉ. नरेंद्र छंगाणी, अित प्राचार्य अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक

बदलाव : जिनसे यह कामयाबी मिली

{दोकरोड़ खर्च कर 40 बैड के लेबररूम की क्षमता 100 की गई।

{ लेबर रूम को एयरकंडीशंड कर दीवारों पर एंटी-इंफेक्शनल पेंट लगाया।

{ लेबर रूम से ही एक एंटीनेटल वार्ड जोड़ा गया, जहां गर्भवतियों को रखा जा सके। लेबर रूम में परिजनों की आवाजाही पर प्रतिबंध।

{ सीनियर डॉक्टर्स की सुबह-शाम फ्लोर ड्यूटी लागू की गई।

{ लेबररूम, ओटी में संक्रमण का स्तर रोज जांचा जाने लगा।

मनोज वर्मा | जोधपुर

@manojverma044

“सरकारीसिस्टम का कुछ नहीं हो सकता’ जैसे जुमले को उम्मेद अस्पताल ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। महज तीन साल पहले फरवरी-मार्च 2011 में संक्रमित ग्लूकोज से प्रसूताओं की मौतों के चलते देशभर में चर्चा में आए इस 100 साल पुराने अस्पताल ने व्यवस्थाओं में ऐसे बदलाव किए कि आज दुनियाभर में सर्वाधिक प्रसव हो रहे हैं। प्रतिदिन औसतन 69 और सालाना 25 हजार से भी ज्यादा। इससे भी बड़ी उपलब्धि, मातृ मृत्यु दर को प्रदेश के अन्य बड़े अस्पतालों की तुलना में कहीं नीचे लाना है। वर्ष 2014 के दौरान जहां उम्मेद अस्पताल में 25 हजार, 113 प्रसव पर 62 प्रसूताओं की मौत हुई। शेष| पेज 10







यहआंकड़ा जयपुर में महिलाओं के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र जनाना अस्पताल से कम है। जनाना अस्पताल में 2013 में 16 हजार 542 प्रसव हुए लेकिन 318 प्रसूताओं की मौते हुई थीं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज की एक रिपोर्ट के अनुसार उम्मेद अस्पताल में हर माह पांच सौ से ज्यादा गर्भवतियां पश्चिमी राजस्थान के दूर-दराज के इलाकों से रैफर होकर आती हैं। इनमें से 48 फीसदी मामले जटिल होते हैं। उम्मेद अस्पताल के डॉक्टर्स नर्सेज संसाधनों की कमी के बावजूद अपना काम बखूबी कर रहे हैं। सरकार ने यहां का दबाव कम करने के लिए एमडीएमएच में बने नए जनाना अस्पताल में 100-100 बैड शिशु रोग गायनी विभाग के लिए रखे गए हैं।

टूटनेलगा था भरोसा: मौतों के बाद आधे रह गए प्रसव

उम्मेद अस्पताल में जनवरी 2011 में 1683 प्रसव हुए थे। 12 फरवरी से संक्रमण से प्रसूताओं की मौतें होना शुरू हुई। इसके बाद अस्पताल में प्रसव की संख्या घटने लगी। फरवरी में यह 1293, मार्च में 818, अप्रेल में 869, मई में 942, रह गई। जून में प्रसव की संख्या ने एक हजार का आंकड़ा (1074) पार किया। 2011 में प्रतिदिन प्रसव का औसत पचास से भी कम रहा। इन दिनों प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) आउटडोर में आने वाले गर्भवतियों की संख्या भी आधी रह गई थी।