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- 50 सीटर बस में 125 स्टूडेंट्स, लोडिंग गाडि़यों में छत तक भरकर स्कूल आते हैं
50 सीटर बस में 125 स्टूडेंट्स, लोडिंग गाडि़यों में छत तक भरकर स्कूल आते हैं
भास्कर टीम. देचू/बाप/बिलाड़ा | िजलेके हजारों स्टूडेंट्स अपने गांव-कस्बों में हायर स्कूल या विषय होने, बालवाहिनियों के अभाव, परिवहन के सीमित साधनों के चलते जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। सर्दी-गर्मी या बरसात, हर मौसम में ये स्टूडेंट्स लोडिंग जीप, पिकअप बस में ठूंस-ठूंसकर भरने के बाद छत के एक-एक इंच पर बैठकर मजबूरी में सफर करते हैं।
देचू कस्बे के साथ-साथ यहां से गुजरने वाले हाई-वे पर हर रोज सैकड़ों विद्यार्थी इसी तरह बस, बोलेरो, पिकअप और टेंपों के अंदर तिल बराबर जगह भी नहीं बचने पर छत के हर इंच पर बिठाए नजर आते हैं। ऐसा नहीं है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन परिवहन विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। इस खतरे को देखने जानने के बाद भी प्रशासन ही कुछ कर रहा और अभिभावक जागरूक हैं। बाप कस्बे में तो सुबह 50 सीटर बस में अंदर और इसकी छत पर मिलाकर 125 तक यात्री होते हैं। इनमें ज्यादातर 10 से 15 साल के स्टूडेंट होते हैं। पीपाड़ सिटी, बीरावास खेजड़ला से चलने वाली रोडवेज बसों में भी यही हाल रहता है। इन गांवों के स्टूडेंट्स को हायर स्टडी कॉमर्स-साइंस पढ़ने के लिए बिलाड़ा तक आना होता है। गड्ढों से भरी सिंगल रोड पर तूफानी स्पीड कभी भी अनहोनी कर सकती है। यह खतरा इन दिनों बारिश के बाद खस्ताहाल हो चुकी सड़कों पर और बढ़ गया है।
तमाम दावों भरपूर स्टाफ बजट के बाद भी शिक्षा विभाग गांव-कस्बों में हायर स्कूल या सभी सब्जेक्ट उपलब्ध नहीं करवा पाया है। स्कूल प्रशासन वाहनों की व्यवस्था नहीं कर पाता। परिवहन विभाग किसी हादसे के बाद ही फौरी कार्रवाई करता है। यहां तक कि पेरेंट्स भी अपनी मजबूरी बताकर बच्चों को जोखिम भरे सफर पर भेजते हैं। इसी के चलते गिनी-चुनी छात्राएं हीं आगे की पढ़ाई के लिए जाती हैं।
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार स्टूडेंट्स को बालवाहिनी जिनमें टैक्सी, वैन स्कूल बस शामिल हैं, में ही ले जाया जाता है। इन पर स्कूल का नाम, स्कूल बस रंग पीला होना जरुरी है। इनमें सीट के बराबर स्टूडेंट ही बैठाए जा सकते हैं। हर वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स एवं छोटे बच्चे होने पर केयरटेकर का होना जरुरी है। लेकिन इन नियमों की पालना कहीं नहीं हो रही है।
^ग्रामीण इलाकों में बालवाहिनियों में निर्धारित से अधिक संख्या में बच्चों को बिठाने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करते हैं। गत दिनों 10 से अिधक ऐसे वाहन