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जेडीए की कमाई रोजाना 50 लाख से घट कर रह गई 5 लाख, रोजमर्रा के कामकाज बंद

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. जोधपुर विकास प्राधिकरण का खजाना खाली है। ऐसे में मानसून में बदहाल हुई सड़कों की मरम्मत कैसे होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। शहर की बड़ी सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जेडीए ने इन सड़कों का सर्वे करवाया है और अब आपदा राहत कोष से बजट की आस लगाई है। साल भर से तंगहाली के बोझ तले दबे जेडीए का बैंक बैलेंस 8 सितंबर तक महज पांच से छह करोड़ रुपए रह गया। इसकी अहम वजह यह है कि जेडीए की आय एकदम कम हो गई। जहां चुनाव से पहले जेडीए में रोजाना औसतन 40 से 50 लाख रुपए आते थे, वहीं अब औसतन पांच से सात लाख रुपए ही आय रह गई है। हालात ये हैं कि ठेकेदारों के भी डेढ़ सौ करोड़ रुपए से अधिक चुकाने हैं।
1. नया मास्टर प्लान अटकने से काम ठप : नयामास्टर डवलपमेंट प्लान अटकने के कारण जेडीए निजी स्वयं की योजनाओं के ले-आउट प्लान और भू-उपयोग परिवर्तन के काम नहीं कर पा रहा है। जेडीए की चार बड़ी योजनाएं भी मूर्त रूप नहीं ले पा रही हैं। इन योजनाआें से जेडीए को सात सौ करोड़ रुपए की आय की उम्मीद है।

2.कैंप बंद होने से नियमन का काम रुका : जेडीएके अफसरों का कहना है कि विधानसभा लोकसभा चुनाव के दौरान करीब पांच माह की आचार संहिता में काम अटक गए, लेकिन नगरीय विकास विभाग की ओर से आयोजित होने वाले कैंप भी बंद हो गए। इनमें पट्‌टे जारी होने और नियमन होने से आय होती थी। जेडीए में ऐसे ढाई सौ से तीन सौ प्रकरण अटके हुए हैं।

3.यूडीएच में अटकी सौ से ज्यादा फाइलें : 5000वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्रफल के भूखंडों के नियमन के लिए जेडीए को नगरीय विकास विभाग से अनुमति लेनी होती है। वर्तमान में सौ से ज्यादा ऐसे प्रकरणों में अनुमति यूडीएच में अटकी हुई है। इनमें गत वर्ष एक नवंबर से अब तक की फाइलें शामिल हैं। जेडीए की ओर से प्रकरणों में अनुमति के लिए प्रयास ही नहीं हो रहे हैं।