जोधपुर. वकीलों की दो महीनों से चल रही हड़ताल से 300 से अधिक उपभोक्ता न्याय से वंचित हुए हैं। हड़ताल का असर उपभोक्ता मंच के दोनों जिला कोर्ट स्टेट सर्किट बेंच में दर्ज होने वाले प्रकरणों पर भी पड़ा है। जिला उपभोक्ता मंच प्रथम द्वितीय में बिजली, पानी,
मोबाइल, फोन, अॉटोमोबाइल, बैंक, लोन, क्रेडिट कार्ड, बीमा कंपनी, राशन की दुकान, सभी प्रकार के गुड्स, स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, फीस अधिक लेने, फीस जमा नहीं करने और स्कूल की टीसी नहीं देने जैसे 200-250 मामले प्रत्येक माह दर्ज होते हैं।
जिला मंच के दोनों कोर्ट प्रत्येक माह औसतन 125 से 150 प्रकरण में फैसले देकर उपभोक्ताओं को राहत देते हैं, लेकिन वकीलों की लगातार हड़ताल के कारण 250 से अधिक उपभोक्ता न्याय से वंचित हो गए हैं। इस हड़ताल के कारण माह में एक बार लगने वाली स्टेट सर्किट बेंच भी नहीं लगी। इसमें भी दो माह में औसतन 125-150 फैसले अटकने से उपभोक्ता न्याय से वंचित रह गए।
हड़ताल से बढ़ी मामलों की पेंडेंसी
जिला उपभोक्ता मंच प्रथम के अध्यक्ष सत्यदेव टाक द्वितीय के अध्यक्ष टीएच सम्मा के अनुसार इस हड़ताल का असर उपभोक्ताओं पर पड़ा है। हालांकि उपभोक्ताओं के खुद पैरवी करने का प्रावधान है, लेकिन उपभोक्ता अधिवक्ताओं के माध्यम से ही आते हैं। ऐसे में मामलों की पेंडेंसी बढ़ी है।
मामला
प्रार्थी ने मंच के समक्ष 31 जुलाई को प्रार्थना पत्र पेश कर बताया कि उनकी पुत्री मीमल सेंट्रल एकेडमी, बनाड़ रोड की छात्रा है। उसने स्कूल से 8वीं पास की, लेकिन उसे उसी स्कूल में 9वीं कक्षा में प्रवेश नहीं दे रहे हैं। इससे पहले 24 जुलाई को फीस जमा कराने गए तो बाबू ने प्रिंसिपल से मिलने को कहा, लेकिन प्रिंसिपल ने मिलने से ही इनकार कर दिया है।
मामला 2- प्रार्थी ने मंच के समक्ष एक अगस्त को पेश प्रार्थना पत्र में बताया कि डिस्कॉम ने पहले उनकी दुकानों में बिजली कनेक्शन नहीं दिया। इसके बाद जब वे न्यायालय के आदेश लाए तो अघरेलू कनेक्शन दे दिया। फिर डिस्कॉम ने सतर्कता दल भेज कर उसकी वीअार शीट भर कर अधिक बिल का भुगतान करने अन्यथा कनेक्शन काटने का नोटिस थमाया है।