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पंचर निकलवाने के 50 रुपए बचाने के लिए ड्राइवर पहिया खोलने में पौन घंटे जूझता रहा, क्योंकि 200 का बिल डिपो पास नहीं करता

7 वर्ष पहले
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घाटेसे जूझ रही रोडवेज के ड्राइवर और कंडक्टर किस दबाव में काम कर रहे हैं, इसका एक उदाहरण शुक्रवार को देखने को मिला। बस का पंचर निकलवाने में महज 50 रुपए बचाने के लिए ड्राइवर को केवल गाड़ी का पहिया खोलने में पौन घंटे मशक्कत करनी पड़ी वरन यात्रियों को भी भारी परेशानी हुई। हुआ यूं कि ब्यावर डिपो की रोडवेज बस आर जे 36 पीए 0834 जोधपुर से भीलवाड़ा के लिए रवाना हुई थी। सुबह करीब 9 बजे बस कापरड़ा पहुंची तो बस पंक्चर हो गई। गाड़ी में स्टेपनी नहीं थी इसलिए चालक ने बस स्टेंड पर पंचर की दुकान पर लाकर बस खड़ी कर दी। पंचर की दुकानमालिक बुधाराम भाटिया ने टायर खोलकर पंचर निकालने के लिए दो सौ रुपए मांगे। परिचालक ने कहा कि डिपो तो पंचर के लिए सिर्फ डेढ़ सौ का बिल ही पास करेगा। चालक और परिचालक ने इतने में पंचर िनकालने की मिन्नतें की लेकिन दुकानदार नहीं माना। यात्रियों ने भी अपनी परेशानी बताई तो दुकानदार डेढ़ सौ में पंचर निकालने को राजी तो हुआ लेकिन उसने ड्राइवर से पहिया खोलकर लाने को कहा। चालक ने काफी मशक्कत कर टायर खोला और पंचर निकलवाया।

पौन घंटे बाद दूसरी बस से यात्रियों को किया रवाना > परिचालकने करीब पौन घंटे बाद कारपड़ा पहुंची फलौदी से जयपुर जा रही बस में यात्रियों को बिठाकर गंतव्य के लिए रवाना किया।

बस ठीक होने का करते रहे इंतजार > सवारियांबाहर खड़ी हो गईं और आधे-पौन घंटे तक बस ठीक होने का इंतजार करते रहे। बस में अधिकांश सवारियां अप-डाउन करने वाली थीं। उन्हें दफ्तर के लिए लेट हो रहा था।