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एसएसए की जांच टीम ने हैडमास्टर वार्डन को माना दोषी

7 वर्ष पहले
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जोधपुर | भावीस्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में सातवीं कक्षा की एक छात्रा को छोड़ शैक्षणिक भ्रमण पर जाने के मामले में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) की जांच टीम ने प्रधानाध्यापिका नीरू कौशिक वार्डन लता वैष्णव को दोषी माना है। इसके लिए जांच टीम ने प्रधानाध्यापिका को नोटिस देकर सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। चूंकि प्रधानाध्यापिका का कहना था कि बालिका के बीमार होने के कारण उसे साथ नहीं ले गए, लेकिन बच्ची को ताले में बंद कर उसकी चाबी अपने साथ ले जाना कार्य में लापरवाही साबित करती है। इसलिए टीम इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। इसमें वार्डन को भी दोषी माना है। इस मामले में एसएसए के एपीसी ओमप्रकाश टाक डीईओ प्रारंभिक शांतिलाल निनामा ने बालिका चौकीदार के बयान लिए हैं।

ये सवाल साबित कर रहे दोष

प्रधानाध्यापिका वार्डन दोनों दोषी है

^बालिकाको अकेेली छोड़ने वाली प्रधानाध्यापिका वार्डन दोनों ही इस मामले में दोषी है। अभी उनके बयान आने हैं। इसके बाद एसएसए आयुक्त को इसकी रिपोर्ट भेज दी जाएगी। -ओमप्रकाश टाक, एपीसी,एसएसए

> जब पता था कि बच्ची बीमार है तो उसे घर पहुंचाने या अभिभावकों को सूचित करने के बजाय वहीं क्यों छोड़ गए?

> बच्ची बीमार थी तो उसे अकेली किसके भरोसे छोड़ा़?

> बच्ची को ताले में बंद करने के साथ उसकी चाबी प्रधानाध्यापिका अपने साथ क्यों ले गई, किसी को चाबी क्यों नहीं दी?

> जब पता चल गया कि बीमार बच्ची अकेली रातभर हॉस्टल में रही तो प्रधानाध्यापिका वार्डन का शैक्षणिक भ्रमण क्या इतना जरूरी था?

> जिले की सभी केजीबीवी इंटर डिस्ट्रिक एजुकेशन टूर में जोधपुर से सटे जिलों में भ्रमण के लिए गई तो भावी स्थित केजीबीवी का दूसरे संभाग में जाना कैसे संभव हुआ, जबकि सभी को इस भ्रमण के लिए समान बजट मिला।

यह है मामला

केजीबीवीभावी की 102 बालिकाओं का दल 9 दिसंबर को मध्य रात्रि दो बजे अंतर जिला शैक्षणिक भ्रमण के लिए उदयपुर रवाना हुआ। इस दौरान हॉस्टल में सातवीं क्लास की छात्रा उदलियावास निवासी सुनीता पुत्री नेमाराम हॉस्टल में सो रही थी। प्रधानाध्यापिका वार्डन ने छात्राओं की गिनती नहीं की और सुनीता को वहीं छोड़ उदयपुर के लिए रवाना हो गए। जब सुनीता सुबह 4:30 बजे नींद से जागी तो उसे कोई नजर नहीं आया। इस पर वह रोने लगी। रोने की आवाज सुन चौकीदार प्रकाश परिहार