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सांगरिया आरओबी शुरू हो गया है। भास्कर ने 22 सितंबर को यह जानकारी दी थी।

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. सात साल के लंबे इंतजार के बाद चार दिन पहले सांगरिया क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज पर यातायात तो चालू हो गया, लेकिन वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत मिलने की बजाय आफत गले पड़ रही है। तो ब्रिज के नीचे सड़कें दुरुस्त की गई हैं और ही ऊपर रोड लाइटें लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात सांगरिया चौराहे पर है। यहां सर्किल स्लीप लेन आदि नहीं बने होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
इन खामियों को लेकर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के प्रवक्ता ने भी यह कहते हुए पल्ला झाड़ दिया था कि खामियों को सुधारने का जिम्मा स्थानीय प्रशासन या स्थानीय निकाय का है। यह पार्ट उनके एग्रीमेंट में शामिल नहीं था। इधर, जेडीए अफसरों ने दावा किया कि अगर बीआरओ ब्रिज खोलने से पहले टूटी सड़कों की मरम्मत करने, रोटरी बनाने या फिर रोड लाइटें लगाने प्रस्ताव भिजवाता तो उस पर सकारात्मक विचार करते। अब तो जेडीए ठेकेदार हड़ताल पर उतरे हुए हैं, ऐसे में ये सभी काम फिलहाल संभव नहीं हैं।

बीआरओ ने तो गलती की ही प्रशासन भी उतना ही दोषी

विशेषज्ञों का मानना है कि पहली गलती तो बीआरओ ने की। बाइपास पर फोर लेन ओवरब्रिज बनाने का नियम होने के बावजूद टू-लेन ब्रिज ही बनाया। दूसरी गलती प्रशासन ने की। उसके किसी भी अफसर ने ब्रिज का तो कभी जायजा लिया और ही इसका नक्शा देखा।

रोटरी भी बन जाती तो आधा समाधान हो जाता

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सांगरिया चौराहे पर बड़ा सर्किल या रोटरी बन जाती तो आधा समाधान निकल जाता। ब्रिज पर 38 हजार पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का दबाव होने के बावजूद फोर लेन की जगह टू लेन का ब्रिज बनाना कई सवाल खड़े करता है। इसके बाद में भी अगर बीआरओ को ब्रिज पर यातायात चालू करना ही था तो पहले वहां की खामियों को दुरुस्त करते। इससे हादसों की आशंका नहीं रहती।