पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कलेक्टर के पास कमान, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई

कलेक्टर के पास कमान, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फिर सिग्नल लाइट्स

हार्ट लाइन में अटक गई हमारी बीआरटीएस

जोधपुर | एशियनविकास बैंक (एडीबी) ने सर्वे में मंडोर से जैसलमेर बाइपास तक का मार्ग बीआरटीएस उसके कॉरिडोर के लिए सबसे उपयुक्त माना था, लेकिन हार्ट लाइन (जालोरी गेट से उम्मेद स्टेडियम तक) की सड़क की चौड़ाई कॉरिडोर के उपयुक्त नहीं होने से समूचा प्रशासन इसके सुधार में जुटा है। शहर में बीआरटीएस के लिए अलग से कॉरिडोर बनाने की लागत इस परियोजना की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। इसके चक्कर में हमारी बीआरटीएस हार्ट लाइन में अटक कर रह गई है। समाधान खोजने में प्रशासनिक उदासीनता के चलते पिछले एक साल से पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के लिए सरकार की आेर से भेजी गई 39 में से 29 बसें रोडवेज वर्कशॉप में पड़ी-पड़ी खटारा हो रही हैं। भास्कर ने बीआरटीएस कॉरिडोर के निर्माण को प्रगति जांची तो स्थिति ऐसी ही नजर आई।

हार्ट लाइन (जालोरी गेट से महामंदिर तक) का यातायात सुधारने के लिए प्रशासन ने दावे तो खूब किए, लेकिन दावे सिरे नहीं चढ़ पाए। लगभग ढाई साल पहले हार्ट लाइन पर ढाई से तीन किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड (सड़क पर सड़क) बनाने की संभावना तलाशी गई। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार करने की कवायद हुई। यह योजना कागजों में दफन हो गई। फिर हार्ट लाइन पर चार फुट ओवरब्रिज बनाने के प्रस्ताव तैयार हुए, टेंडर भी निकाले गए, लेकिन बात मॉनिटरिंग कमेटी के दौरे से आगे नहीं बढ़ी। देश के महानगरों से आए विशेषज्ञों की राय के विपरीत हार्ट लाइन के चौराहों (सर्किल) को आनन-फानन में हटा दिया गया और सिग्नल लाइट्स से यातायात का संचालन शुरू किया गया। हार्ट लाइन के सर्किल पर आेवरब्रिज बनाने के लिए डीपीआर तैयार हुई। लागत को देखकर घबराए अफसरों ने छोटे सर्किल बनाकर ट्रैफिक का संचालन करने का फैसला ले लिया।