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384 फ्लैट, इतने बुरे हाल, रहने आया एक परिवार कोर्ट में हाउसिंग बोर्ड का जवाब- सुविधाएं लाजवाब
राजस्थानआवासन मंडल ने 2010 में कुड़ी में विशिष्ट पंजीकरण योजना के तहत बिना लिफ्ट वाली जी प्लस थ्री इमारतों में 384 फ्लैट तैयार करवाए। इनमें से 282 आवंटियों को फ्लैट का कब्जा दिया। दो सौ परिवार रहने को भी तैयार हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से वे यहां रह नहीं पा रहे। वर्तमान में एक ही परिवार यहां रह रहा है। हालात यह हैं कि पानी जैसी आवश्यक सुविधा भी हाउसिंग बोर्ड नहीं दे पाया है, ऐसे में इस परिवार को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भास्कर ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि आवासन मंडल ने एक तो देरी से कब्जा दिया और सबसे बड़ी कमी यह रही कि यहां आधारभूत सुविधाएं ही नहीं हैं, इस कारण लोग यहां रहने नहीं आए। हालांिक बोर्ड ने उपभोक्ता मंच में शपथ पत्र देकर कहा है कि वहां सभी सुविधाएं जुटा दी गई हैं।
कुड़ी योजना में घोषणा के अनुसार रोड लाइट समय पर उपलब्ध नहीं होने से लोग रहने को तैयार नहीं हैं। फ्लैट में भी बिजली सुविधा नहीं है।
मौके पर तो पूरी सड़कें बनी हैं और ही सीवरेज की व्यवस्था। इन खामियों के चलते लोग रहने की स्थिति में नहीं हैं।
योजना के तहत पाइप लाइन पूरी तरह नहीं बिछ पाई है। फ्लैट में पानी नहीं आने से पानी के टैंकर ही विकल्प है। ऐसे में लोगों का कहना है कि पानी जैसी सुविधा के बिना कैसे रहें?
समस्या| बिजलीऔर सीवरेज भी नहीं
पैसा| ज्यादादेने पड़े नौ लाख
फ्लैट की मूल कीमत में कई तरह चार्ज जुड़ने से लागत काफी बढ़ गई। भूतल पर फ्लैट की मूल कीमत 13 लाख रुपए थी जिसके आवंटियों को 22 लाख रुपए चुकाने पड़े। इसी तरह प्रथम तल पर 11.90 लाख की बजाय 18.40 लाख, द्वितीय तल पर 11.65 लाख की बजाय 19.81 लाख और तृतीय तल पर 11.10 लाख की बजाय 17.50 लाख वसूले गए।
एक अक्टूबर को कुड़ी और विवेक विहार में बनने वाले कुल 786 फ्लैट की लॉटरी निकाली जानी है। उद्यान अपार्टमेंट विस्तार योजना के फ्लैट्स के पजेशन भी दिए जाएंगे। आवंटी भी यदि जागरूक रहे और निर्माण के दौरान अफसरों से मिल कर सुविधाओं के लिए लगातार बात करते रहें तो पजेशन के समय उन्हें असुविधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
चुनौती| नईयोजनाएं कैसे होंगी सफल?
(कुड़ी हाउसिंग बोर्ड के आवासीय अभियंता एके भाटी से सीधी बात)
बहाना| आचारसंहिता से हुआ विलंब
दावा| सारीसुविधाएं दीं
उपभोक्ता मंच में वाद के जवाब में ह