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यहां कभी डंपिंग स्टेशन होता था...

6 वर्ष पहले
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पशु चरते थे, अब बच्चे खेलते हैं

100 ट्रक कचरा हटाया

एमडीएमएच के चाइल्ड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ.मनीष पारख औरिजरिएटिक विभाग के सहायक आचार्य डॉ.हरीश अग्रवाल केअनुसार...

आंखों की रोशनी बढ़ी। ग्रुप गेम्स से सहयोग करना सीखा।

टीवी, कंप्यूटर से बच्चे हटे तो पेरेंट्स भी खुश। संडे को मैचेज कार्यक्रम होते हैं।

एक पेरेंट के अनुसार टीवी से बच्चों की आंखें कमजोर थी।

डाॅ. गोपालचंद ने बताया कि बच्चों मंे मोटापा टमी निकलने से चिंतित थे।

आप भी अपनी कॉलोनी के पार्क की सूरत बदल सकते हैं, अपने बच्चों और बूढ़ों के हर दिन में बहुत सारी खिलखिलाहटें जाेड़ सकते हैं। प्रयास आप करें, भास्करमहकमोंऔर संस्थाओं को साथ लाकर इस प्रयास को सफल बनाएगा। अगर आप कॉलोनीवासी यह काम हाथ में लेना चाहते हैं तो सम्पर्क करें- 9649281000

बखतसागर स्थित गणगौर पार्क पशुबाड़ा बन चुका था। क्षेत्रवासियों ने राशि एकत्र की। इससे झूले लगवाए, भजन के लिए म्यूजिक सिस्टम लगवाया। दो हॉल रिपेयर करवाए। बचे 12-13 लाख की एफडी करवाई। ब्याज हॉल के किराए से पार्क मेंटेन होता है। अब महिलाओं के योगा सेशन, बुजुर्गों की गोष्ठी बच्चों के गेम होते हैं। साल में दो आयोजन होते हंै। समिति अध्यक्ष बताते हैं कि पार्क में नियमित तौर पर आने वाले लोगों की टेंशन भी कम हुई है।

शास्त्री नगर सी सेक्टर में श्री सत्यनारायण पार्क डंपिंग स्टेशन बन चुका था। मोहल्ला विकास समिति ने 100 ट्रक कचरा उठवाया। क्षेत्रवासियों ने पौधे घास रोपे। झूले लगवाए ग्राउंड बनवाया। अब यहां घने पेड़, बॉस्केटबाल कोर्ट, घास, कुर्सियां वॉकिंग ट्रैक है। सुबह-शाम सैकड़ों बच्चे, महिलाएं वॉक करने आते हैं। एक वॉचमैन भी है। कॉलोनी के लिए साल में 4 बड़े आयोजन होते हैं। व्यवस्थाओं के लिए शुल्क लिया जाता है।

जोधपुर| शहरमें कई सार्वजनिक पार्कों से हरियाली नदारद हुई तो कई डंपिंग स्टेशन ही बना दिए गए। वहीं कुछ कॉलाेनियों में शहरवासियों ने पार्कों का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया और अपने प्रयासों मेहनत से इन्हें गुलजार कर दिया। अब इन पार्कों में लहलहाती हरियाली के साथ बच्चों, बड़ों बुजुर्गों की खुशियां खिलखिला रही है।

बच्चों का दिमाग वीडियोगेम पर टाइम बिताने वालों से सार्प

इंटरेक्शन, एक्सरसाइज से स्टेमिना बढ़ता है। ब्रेन एडवांस होता है

मोटापा कम, बीपी कंट्रोल में। कैलोरीज इनपुट-आउटपुट बैलेंस

सिरोटोनिन हार्मोन रिलीज होता है, जो भूख बढ़ाता है, नींद आती है

हवा-रोशनी से बैक्टीरिया हार्मफुल माइक्रो से सुरक्षा। आंखों को नेचुरल कलर से फायदा

40-50

मिनटवॉकिंग से 300-400 किलो कैलोरी बर्न होती है

बिजनेस मैन भागचंद जैन ने बताया कि पहले वे सरदारपुरा में रहते थे। भीड़भाड़ वाला क्षेत्र होने के कारण बच्चों को घर में रखना पड़ता था। फिजिकल एक्टिविटी नहीं होने से उनका शारीरिक विकास थम सा गया था। बेटे राहुल शिशिर की फिटनेस भी बिगड़ रही थी। ऐसे में परिवार में चर्चा कर उन्होंने घर बदलने का फैसला किया। कमला नेहरू नगर एक्सटेंशन सेक्टर-सी में घर लिया। यहां पार्क होने से वे शाम को पूरी फैमिली के साथ घूमने जाते हैं। बच्चों की फिटनेस और उनका स्वास्थ्य सुधरा।

बकौल एसएम वर्धन स्वभाव में चिड़चिड़ापन उदासी थी।

पीएम जैन के अनुसार कई बुजुर्गों का जीवन एकाकीपन ने नीरस कर दिया था।

हंसी-ठिठोली योगा से मन-चित शांत रहता है।

एसएम मोहनोत ने बताया, नींद या टीवी से टाइम पास करते।

पार्क में चर्चा सत्संग करते हैं। बच्चों युवाओं से मेल-मिलाप से गैप घटने लगा।

पार्क में वॉक एंजॉयमेंट से अच्छा समय बीतने लगा।