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- केस हारने की खीज में रिटायरमेंट से 4 दिन पहले रोक दिए लाभ, चार साल संघर्ष के बाद हासिल किया हक
केस हारने की खीज में रिटायरमेंट से 4 दिन पहले रोक दिए लाभ, चार साल संघर्ष के बाद हासिल किया हक
चारसाल पहले नागौर निवासी इंद्रसिंह राजपुरोहित के परिजन उनके रिटायर होने के उपलक्ष्य में पार्टी की तैयारियों में जुटे थे कि रिटायरमेंट से कुछ ही घंटों पहले रोडवेज ने चार्जशीट दे दी। उनके परिलाभ रोक लिए। खुशियों का उत्साह फीका पड़ गया। राजपुरोहित 1978 में रोडवेज बस ड्राइवर बने। इससे पहले भारतीय सेना में। उन्होंने तय किया कि परिवार के सामने वे अपने को बेगुनाह साबित करेंगे। उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद अब हाईकोर्ट ने रोडवेज प्रबंधन को बकाया राशि को दो महीने में मय ब्याज लौटाने का आदेश दिया है। रोडवेज पर 20 हजार की कॉस्ट भी लगाई। कोर्ट ने यह भी कहा कि रोडवेज की यह कार्रवाई किसी जुल्म से कम नहीं है। फैसले से खुश राजपुरोहित बताते हैं कि घरवालों ने रिटायरमेंट पार्टी का न्यौता दे दिया था। लेकिन सब तैयारियां धरी रह गईं। रिटायरमेंट से महज चार दिन पहले चार्जशीट थमा कर मेरे परिलाभ से दो साल के वेतन के बराबर राशि रोक ली। यह समझ नहीं रहा था कि घर पर क्या बताऊंगा। समाज में किरकिरी हुई वह अलग। चार साल तक मैं और मेरा परिवार तनाव में रहा। जब भी किसी के रिटायरमेंट का कार्यक्रम देखता तो मुझे मेरा दर्द सताता। आर्थिक संकट के कारण परिवार की व्यवस्थाएं भी प्रभावित रहीं। हाईकोर्ट के फैसले से मुझे बहुत खुशी हुई। जैसे मेरे घर तो आज ही दिवाली आई है।
राजपुरोहित को झुंझुनूं डिपो में नियुक्ति दी गई थी। उनके लाइसेंस में जन्मतिथि 15 अप्रैल 1954 अंकित थी तो उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 31 जुलाई 2010 तय कर दी गई, जबकि सर्विस रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 31 जुलाई 2008 में रिटायर होना था। 27 जुलाई 2010 को गलत प्रमाण देने सहित चार अलग-अलग आरोप लगा कर उन्हें चार्जशीट दे गई। इंद्रसिंह ने अधिवक्ता संदीप शाह के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता शाह का तर्क था कि छह अन्य चालकों का जन्म वर्ष भी 1950 है और उन्हें वर्ष 2010 में रिटायर किया जा रहा है, जबकि याचिकाकर्ता के लिए सेवानिवृत्ति वर्ष 2008 निर्धारित किया गया। शाह ने यह भी कहा कि लाइसेंस केवल वाहन चलाने के लिए अधिकृत होने के संबंध में दिया गया था, जन्म तिथि का फायदा उठाने की कोई कोशिश नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने राजपुरोहित के हक में फैसला दिया।
इंद्रजीत सिंह