पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पेट्स पर चिपकने वाले कीड़े कर रहे लोगों को बीमार : डॉ. जोशी

पेट्स पर चिपकने वाले कीड़े कर रहे लोगों को बीमार : डॉ. जोशी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
घरेलूजानवर श्वान, गाय, भैंस आदि में टिक्स (शरीर पर चिपक कर खून चूसने वाले छोटे कीड़े) से भी लोग बीमार हो रहे हैं। कीड़ों का वायरस जानवरों में और फिर मनुष्यों में भी पहुंच जाता है। मनुष्य से मनुष्य में भी इसका प्रवेश होता है। इसे क्रिमिंग कांग्रो हिमरोजिक फीवर (सीसीएचएफ) कहते हैं। राजस्थान में लोगों के जानवरों से अधिक संपर्क में रहने से यह बीमारी यहां फैल रही है। ये बात मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र में चल रही राजस्थान कॉनक्लेव-2 में नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज के पूर्व निदेशक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) दिल्ली के एक्सपर्ट डॉ. पीएल जोशी ने कही। उन्होंने कहा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे को इसके प्रमाण राजस्थान के सिरोही जिले में मिले हैं। पिछले दिनों इस क्षेत्र में दो रोगियों में सीसीएचएफ की पुष्टि हुई है, हालांकि अभी तक इस बीमारी से किसी की मृत्यु होने की खबर नहीं है। गुजरात में वर्ष 2008-09 में इस बीमारी से कई मौतें हुई थीं। सीसीएचएफ में बुखार में मरीज के शरीर में ब्लीडिंग होती है। कॉनक्लेव के दूसरे दिन मेडिकल कॉलेज और देशभर से आए रिसर्चर्स ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। इसमें क्षेत्र की समस्या, न्यूट्रीशियन, मलेरिया, डेंगू, इम्यूनाइजेशन, चिकनगुनिया और वेक्टर बाेर्न डिजीज पर चर्चा की गई।

प्रदेश में भी मिले इसके प्रमाण, मलेरिया वैक्सीन आने में लगेगा पांच साल से अधिक समय

डॉ. जोशी ने बताया कि सरकार ने आशा सहयोगिनियों को मलेरिया रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (कार्ड टेस्ट) की स्ट्रिप दी है। इससे टेस्ट में आसानी होती है और मरीजों को तुरंत ही उपचार मिल जाता है। स्ट्रिप टेस्ट की रिपोर्ट को आंकड़ों में शामिल नहीं करना गलत है। यह स्ट्रिप बाजार में 50 से 100 रुपए की मिलती है।

मलेरिया में कार्ड टेस्ट कारगर

पर्यावरण में बदलाव से प्रदेश में बढ़ रही बीमारियां

राजस्थानका बड़ा भूभाग रेगिस्तान है। यहां नहर आने से पर्यावरण में बदलाव हुआ है। गेहूं और चने की फसलें पैदा हो रही हैं। ऐसे में हरियाली के कारण मच्छर पैदा होंगे। बीमारियां भी बढ़ेंगी।

डॉ. पीएल जोशी

डॉ. जोशी ने बताया कि मलेरिया सहित कई वैक्सीन पर विदेशी कंपनियां भारत देश के बाहर रिसर्च कर रही है। इनके लोगों तक पहुंचने में 5 से 10 साल का समय लगेगा। पोलियो वैक्सीन जहां 95 फीसदी से अधिक अस