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खेती में रसायनिक पदार्थ के उपयोग से पनपती है बीमारियां : संत कृपाराम

7 वर्ष पहले
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मथानिया| संतकृपाराम महाराज ने कहा कि मनुष्य में खाने, पीने तथा वाणी का विवेक होना चाहिए। इन तीनों विवेक से पहला सुख निरोगी होगा। संत कृपाराम महाराज मंगलवार रात्रि को मथानिया के मुख्य चोहटे में भारतीय किसान संघ द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्त मानव रसायन मुक्त खेती के जन -जागृति अभियान में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि ऋषि संस्कृति से भारतीय संस्कृति बनी है। जैविक खेती से टिकाऊ खेती होती है। जैविक खेती मानव जीवन पर्यावरण संतुलन के लिए लाभकारी है। लेकिन आजकल मनुष्य अपने आर्थिक लालच के कारण खेती में अंधाधुंध जहर रसायनों का प्रयोग कर रहे है। जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। इन जहर से मनुष्य में कई लाइलाज बीमारियां पनप रही है। उन्होंने नशा प्रवृत्ति का घोर विरोध करते हुए युवाओं ग्रामीणों से किसी प्रकार का नशा नहीं करने का आह्वान किया। इस दौरान संत राजाराम महाराज, संत नारायण महाराज एवं बांके विहारी ने भी अपने विचार रखे।

जन-जागृतिरथ कर रहा किसानों को जागरुक

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सह जैविक प्रमुख रतनलाल डागा ने बताया कि किसान संघ पूरे देश भर में रचनात्मक अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जोधपुर जिले भर में नशा मुक्त मानव रसायन मुक्त खेती जन-जागृति के रथ यात्रा गांव में जा रही है। जहां पर किसान ग्रामीणों को गोष्ठियों, नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। जिसका समापन जनवरी में फलौदी में होगा। प्रवचन समारोह में भारतीय किसान संघ के जिला संगठन मंत्री पुष्करराज, महामंत्री तुलछाराम सिंवर , मथानिया नगर इकाई के ओमप्रकाश बूब, दिग्विजय सिंह चारण, करणी सोसायटी के माणकराम परिहार, भंवर भारती समेत बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, युवतियों सहित ग्रामीणों ने भाग लिया।

नशा मुक्त मानव खेती का उद्देश्य रथ यात्रा आज से

लोहावट| भारतीयकिसान संघ की नशा मुक्त मानव खेती के उद्देश्य से जोधपुर जिले में चलाई जा रही रथ यात्रा का गुरुवार से लोहावट क्षेत्र में शुभारंभ होने जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष पांचाराम विश्नोई ने बताया कि गुरुवार सुबह 11 बजे रथ यात्रा जिलाध्यक्ष नरेश व्यास की अध्यक्षता में लोहावट विशनावास से शुरू होकर जाटावास, मगरा, भाखरी, पीलवा आदि होते हुए रात्रि विश्राम छीला गांव में तथा शुक्रवार सुबह से रूपाणा, जैताणा, विष्णु नगर आदि होते हुए रात्रि विश्राम मुंजासर गांव में