जोधपुर. शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को सुगम बनाने के लिए आई बीआरटीएस की बसें प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक साल से अभी तक सड़क पर नहीं उतर पाई हैं। पूर्व की अशोक गहलोत सरकार ने 13 सितंबर 2013 को 39 मिनी बिग लो फ्लोर बसें दी थीं। यूडीएच विभाग की ओर से उपलब्ध इन बसों में से 10 मिनी बसें शहर में संचालित की जा रही हैं। शेष 29 बिग लो फ्लोर बसें रोडवेज के भदवासिया वर्कशॉप में नकारा पड़ी हैं। 10 करोड़ की बसों की कीमत खड़े-खड़े ही 6 करोड़ हो गई है। इसके अलावा ये बसें पड़ी-पड़ी कंडम हो चुकी हैं। किसी की सीट गायब है, तो किसी का कांच टूटा पड़ा है। डीजल की इन बसों की मेंटिनेंस नहीं होने से कई के इंजन भी खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
2 करोड़ की वैल्यूएशन घटी: रोडवेज के एमओ मोहनसिंह के अनुसार रोडवेज में एक बस की औसत उम्र 8 साल आंकी जाती है। इसके बाद बस 5-6 लाख रुपए का कबाड़ बनकर रह जाती है। रोडवेज के फॉर्मूले को आधार माना जाए, तो एक साल में प्रति बस 7-8 लाख रुपए डेप्रिसिएशन लग जाता है। ऐसे में एक साल से खड़ी इन 29 बसों की कीमत 2 करोड़ रुपए से भी अधिक घट चुकी है। इसके अलावा टायर, बैटरियां, रंगरोगन, ऑयल शीट सीटों का नुकसान अलग से है।
2 करोड़ सर्विसिंग संचालन व्यय: रोडवेजने नगर निगम से 1.65 करोड़ रुपए का संचालन व्यय एमओयू की शर्त के अनुसार मांगा है। नगर निगम को इन बसों की बिना सर्विसिंग कराए ही कंपनी को 50 लाख रुपए का बिल चुकाना है। बीआरटीएस बसों में लगे 29 लाख रुपए के टायर-ट्यूब धूप में खड़े रहने से खराब हो गए हैं। तीन लाख रुपए की बैटरियां बदलनी पड़ेंगी। एक लाख रुपए छोटे-मोटे पार्ट्स ऑयल शीट इत्यादि पर खर्च।
नुकसान तो हो गया, लेकिन हमारे पास संसाधन नहीं: सीईओ
पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के लिए एक साल पहले आई थीं 39 बसें रोडवेजऔर निगम 29 बसों को चला पाए किया रखरखाव
निगम सीईओ हरिसिंह राठौड़ से सीधी बात
बीआरटीएस बसें एक साल में भी शुरू नहीं हो पाई हैं?
सरकार ने पब्लिक पार्टनरशिप के तहत बसें चलाने का आदेश दिया है। शीघ्र ही चलाई जाएंगी।
एकसाल से बंद पड़ी रहने के कारण इनकी वैल्यूएशन दो करोड़ रुपए घट गई है। निगम को तो सीधा नुकसान हो गया?
अबक्या कर सकते हैं। नगर निगम के पास संसाधन नहीं हैं। रोडवेज से पहले एमओयू हुआ था। उनके पास भी साधन नहीं हैं। इसलिए नहीं चला रहे हैं।