पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • एक साल में रिकवर हो जाता है डोनर का िलवर: डॉ. बोरा

एक साल में रिकवर हो जाता है डोनर का िलवर: डॉ. बोरा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जोधपुर. इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल एसएस वैलनेस के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को एक निजी होटल में सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट एवं लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन ने तीनों क्षेत्रों में उपचार से जुड़ी नवीनतम जानकारियां दीं। वर्तमान हालातों में डॉक्टरों के साथ आमजन को भी इनकी जानकारियों से अपडेट होना जरूरी है। सीएमई का शुभारंभ डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केसी अग्रवाल ने किया।

ब्लड ग्रुप मैच होने पर भी किडनी ट्रांसप्लांट संभव : डॉ. सागर

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. गौरव सागर ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट डोनर मिलने के बाद मैच करना कठिन होता है। भारत में भी एबीओ इन्कंपेटिबल किडनी ट्रांसप्लांट होने लगा है। इस तकनीक में मरीज के ब्लड ग्रुप में मौजूद एंटीबॉडीज जो दूसरे ग्रुप को स्वीकार नहीं करती है, उनका प्रभाव दवाइयों से कम किया जाता है। दो सप्ताह की इस प्रक्रिया के बाद किसी भी ब्लड ग्रुप की उपलब्ध किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। इसका सर्वाधिक इस्तेमाल जापान में होता है। डायलिसिस को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं, जबकि डायलिसिस पर मरीज 10-15 साल निकाल सकता है।

एंजियोप्लास्टी के बाद दवाइयों का मैनेजमेंट जरूरी : डॉ. देवड़ा

देश में हर साल 20 हजार लिवर डोनेशन की जरूरत: डॉ. बोरा

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेंद्र देवड़ा ने बताया कि हार्ट के ब्लॉकेज हटाने के लिए एंजियोप्लास्टी का प्रयोग बढ़ा है। इसलिए जरूरी है कि एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज का खून पतला रखने के लिए दवाइयां का मैनेजमेंट सही हो। इसके अभाव में किसी अन्य बीमारी के उपचार के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि एंजियोप्लास्टी होने के एक साल तक विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इस दौरान मरीज के दो तरह की दवाइयां चलती हैं। एक दवाई एक साल में बंद की जाती है, लेकिन मरीज डॉक्टर के परामर्श के बिना दवा बंद करें।

लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. गिरीराज बोरा ने बताया कि लिवर सिरोइसिस हैपेटाइटिस के चलते देश में लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता बढ़ रही है। लिवर के आठ हिस्से होते हैं। परिजन लिवर के चार हिस्से डोनेट करते हैं, जिन्हें मरीज के लिवर के खराब हिस्से की जगह प्रत्यारोपित किया जाता है। डॉ. बोरा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि लिवर डोनेट करने बाद डोनर को छोटे लिवर के साथ ही जीना पड़े है।