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मन, वचन और काया के योग को करें सार्थक: साध्वी सुमन
साध्वीसुमन ने कहा कि पृथ्वी पर जन्म लेने पर व्यक्ति को मन-वचन-काया, तीन योग प्राप्त होते हैं। इसके माध्यम से वह व्यक्त और अव्यक्त रूप से हर पल कुछ कुछ करता रहता है। यदि प्रत्येक मनुष्य मन से, शुभ भावना से, वचन से और मधुर अभिव्यक्ति करे और काया से सेवा, परोपकार में जीवन को लगा देंं तो धरती पर स्वर्ग उतर सकता है। वे शनिवार को निमाज की हवेली स्थित महावीर जैन भवन में साधकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि कर्म सिद्धांत का नियम है कि जो हम यहां लुटाते हैं, वहीं हम पर लौटता है। जो हम बांटते हैं, वहीं हम बटोरते भी हैं। कोई हमारे समक्ष हाथ फैलाए उससे पूर्व ही देने के लिए हमारा हाथ उठ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रतिध्वनि बनकर लौटती है। यदि कीचड़ में पत्थर फेंके तो वह भी वैसी प्रतिक्रिया करता है। छींटे उछालें तो नीचे गिरकर वह कपड़े गंदे करता है। आकाश में धूल उछालो तो लौटकर हमारे ऊपर ही गिरती है। इसी प्रकार देना पारस मणि के समान है। जिसके पास कुछ नहीं होता, उसे मन-वचन-काया तो मिले ही हैं, इन तीनों योग को सार्थक कर हम लोक कल्याण कर सकते हैं।