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मिनिमम स्टेंडर्ड के बिना कॉलेज को दी मान्यता
राजस्थानआयुर्वेदविश्वविद्यालय जोधपुर ने सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन के नियमों को ताक में रखकर मिनिमम स्टैंडर्ड के बिना ही चौमूं की महात्मा ज्योतिबा फूले पिलानी के शेखावाटी आयुर्वेद कॉलेज को मान्यता देने का मामला सामने आया है। यह खुलासा निरीक्षकों द्वारा की गई निरीक्षण रिपोर्ट में हुआ है। यहां आउटडोर इनडोर के मरीजों का रिकार्ड झूठा तैयार किया जाता है। साथ ही स्टाफ भी निर्धारित मानदंड के अनुसार नहीं है। महात्मा ज्योतिबा फूले चौमूं ने बैचलर इन आयुर्वेद, मेडिसन एंड सर्जरी (बीएएमएस) में 100 सीट के लिए आवेदन किया है।
सीसीआईएम के पूर्व अध्यक्ष डॉ.वेदप्रकाश त्यागी ने बताया कि भारत सरकार की अनुमति से सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) नई दिल्ली ने 19 जुलाई 2012 को मिनिमम स्टेंडर्ड नोटिफाइड किया है, जिसकी पालना अनिवार्य है। राजस्थान में आयुर्वेदिक कॉलेजों को मान्यता देने का गौरखधंधा चल रहा है। इधर, सिंडिकेट सदस्य वैद्य हरिनारायण स्वामी का कहना है कि राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक स्तर पर एक्ट मिनिमम स्टेंडर्ड के विपरीत निम्न स्तर के कॉलेजों को मान्यता दी जा रही है। एकेडेमिक काउंसिल में बार-बार ठीक करने के लिए प्रस्ताव रखे जाते हैं। लेकिन नियमानुसार पालना नहीं की जाती।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने नियम रखे ताक पर, चौमू के महात्मा ज्योतिबा फूले पिलानी के शेखावाटी आयुर्वेद कॉलेज में अस्पताल ही नहीं
पालना नहीं होने पर प्रवेश से वंचित
मिनिमम स्टेंडर्ड की पालना नहीं करने पर उदयपुर के मदन मोहन मालवीय आयुर्वेदिक कॉलेज की वर्ष 2011 में मिनिमम स्टेंडर्ड के चलते जीरो सेशन घोषित किया।
^हमने प्रथम दृष्टया के आधार पर मान्यता दी है। एक बार फिर इनका निरीक्षण कराया जाएगा। चौमू के ज्योतिबा फूले आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता के लिए केन्द्र सरकार को भेजा है। जबकि पिलानी के शेखावाटी आयुर्वेद महाविद्यालय पिछले 5-6 साल से संचालित है। राज्य सरकार ने एनओसी जारी कर दी है। -डॉ.राधेश्यामशर्मा, कुलपति,राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर