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ग्राम सभाएं होना तो दूर पंचायतों के ताले भी नहीं खुले

7 वर्ष पहले
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स्थानीयपंचायत समिति भवन में बुधवार को पंचायत समिति सदस्यों सरपंचों को विदाई लेने के बाद जनप्रतिनिधि भी अपनी-अपनी ग्राम पंचायत को शायद भूल ही गए। इसका पता गुरुवार को उस वक्त चला, जब राज्य सरकार के आदेश के बावजूद ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना था। लेकिन ग्राम पंचायतें होना तो दूर, ग्राम पंचायतों के ताले तक नहीं खुले। गुरुवार को भास्कर टीम ने फलौदी के कई इलाकों में इसकी पड़ताल की तो बीडीओ महावीरसिंह राठौड़ सहित अन्य अधिकारी शाम तक भी यह बताने की स्थिति में नजर नहीं आए कि क्षेत्र की 37 ग्राम पंचायतों में कहीं विशेष ग्राम सभा का आयोजन हुआ भी है या नहीं। दो ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर तो भास्कर टीम को ताले लगे हुए मिले और इस पर जमी मिट्टी से जाहिर हो गया कि कई दिनों से ये ताले खुले भी नहीं है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने गत दिनों एक आदेश जारी कर तमाम ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभा का आयोजन करने को कहा था। इसका उद्देश्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना का लाभ इच्छुक एवं योग्य युवाओं तक पहुंचाना था। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय केंद्र सरकार की निर्धन ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास एवं उनके रोजगार के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना है। योजना में केंद्र राज्य सरकार का अंश 75:25 के रूप में निर्धारित है। केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान को आगामी वर्ष में एक लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अनुमोदन किया गया है। राजस्थान में इस योजना को लागू करने के लिए राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कौन हो सकते हैं लाभार्थी

18से 35 वर्ष के वे निर्धन ग्रामीण युवा जो

1 > चयनितबीपीएल परिवार के सदस्य हैं।

2> जिन्होंनेगत तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 35 दिन तक मनरेगा योजना में काम किया है

3> ग्रामीणनिर्धन का भागीदारी पूर्ण(पीआईपी)प्रक्रिया द्वारा निर्धारण।

यह होना था विशेष ग्राम सभाओं में

विशेषग्राम सभाओं में ऐसे युवाओं से आवेदन पत्र भरवाकर प्रशिक्षण के लिए उनका चयन किया जाना था। ग्राम सभाएं नहीं होने से तो युवाओं के आवेदन पत्र भरवाए जा सके और ही उचित प्रशिक्षण के लिए किसी भी युवा का चयन हो पाया। इससे इन गांवों के युवा योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णतया निशुल्क है।

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